6 महीने बाद भी नहीं बनी सड़क! बारिश में बैरियो गांव का हाल बेहाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
छह माह बाद भी नहीं जागी व्यवस्था: बरसात में फिर उभरा डाढा पंचायत के बैरियो की बदहाल सड़क का दर्द, ग्रामीणों ने सांसद-विधायक व डीसी से लगाई गुहार
चतरा : डाढा पंचायत अंतर्गत बैरियो गांव की जर्जर मुख्य सड़क का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब छह माह पूर्व 18 फरवरी 2026 को इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद अब तक न तो जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल हुई और न ही प्रशासनिक स्तर पर सड़क निर्माण की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई की गई। इधर लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क की स्थिति और भी भयावह हो गई है, जिससे ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया है।
ग्रामीणों ने पत्रकारों के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि गांव की मुख्य सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हल्की बारिश होते ही सड़क पर कीचड़ और जलजमाव हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को विद्यालय जाने, किसानों को खेतों तक पहुंचने, मरीजों को अस्पताल ले जाने तथा दैनिक कार्यों के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि फरवरी में समाचार प्रकाशित होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे, लेकिन समय बीतने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। बरसात शुरू होते ही सड़क की बदहाली ने गांववासियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
ग्रामीणों ने चतरा के सांसद कालीचरण सिंह, स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान, उपायुक्त रवि आनंद तथा राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि गांव के विकास की रीढ़ होती है। जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक क्षेत्र के विकास की कल्पना अधूरी रहेगी।
गांववासियों ने स्पष्ट कहा कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। वे चाहते हैं कि संबंधित विभाग शीघ्र तकनीकी सर्वे कराकर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करे, ताकि बरसात सहित पूरे वर्ष लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन करने को विवश होंगे। अब जिले की जनता की निगाहें सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि आखिर बैरियो गांव की वर्षों पुरानी इस ज्वलंत समस्या का समाधान कब तक होता है।


