महुगांई में दलितों की जमीन कब्जाने का आरोप, कार्रवाई की मांग को लेकर विधायक से मिले ग्रामीण

जमीन हड़पने और बेदखल करने की कोशिश का आरोप, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

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मेदिनीनगर : पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के महुगांई गांव में दलित परिवारों की खतियानी जमीन पर अवैध कब्जा, फर्जी खरीद-बिक्री और बेदखल करने के प्रयास का मामला सामने आया है। बुधवार को भुइयां समाज के दर्जनों ग्रामीण पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता एवं डीएसपी से मिलकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा न्याय दिलाने की मांग की। महुगांई निवासी सुनैन राम ने पलामू के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, डीएसपी सहित अन्य अधिकारियों को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके परदादा स्वर्गीय धुपई भुइयां के नाम दर्ज खतियानी जमीन (खाता संख्या-102, प्लॉट संख्या-960 एवं 961) पर वर्षों से उनके परिवार का मकान है। आरोप है कि गांव की स्वर्गीय धान कुंवर देवी एवं उनके पुत्र दामोदर मिश्रा ने अनपढ़ होने का फायदा उठाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई और बाद में उस पर अवैध कब्जा कर लिया।
आवेदन में कहा गया है कि दामोदर मिश्रा ने उक्त जमीन का एक हिस्सा जुगेश्वर साव को बेच दिया तथा गलत चौहद्दी दिखाकर अन्य जमीनों पर भी कब्जा कराने का प्रयास किया। सुनैन राम ने आरोप लगाया कि दामोदर मिश्रा एवं जुगेश्वर साव के पुत्र मजनू साव द्वारा उन्हें और उनके परिवार को घर से बेदखल करने की धमकी दी जा रही है तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर प्रताड़ित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खाता संख्या 1, 8, 13, 36, 91, 92 एवं 102, 98/122 से संबंधित कई प्लॉटों 759, 947, 944, 796, 1516, 1362, 1313, 1313/1844 की जमीन भी गलत चौहद्दी दिखाकर अन्य लोगों के कब्जे में दिला दी गई है। सुनैन राम, गुड्डू राम, अजय राम, जानकी देवी, सरोजनी देवी, मंगरी देवी सहित अन्य लोगों ने दामोदर मिश्रा, जुगेश्वर साव, विश्वनाथ साव, भागेश्वर साव और उपेंद्र बैठा पर फर्जी खरीद-बिक्री के आधार पर खतियानी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अतिक्रमण हटाकर खतियानी जमीन वापस दिलाने, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

नाबालिग पहचानकर्ता बनने पर विधायक ने उठाए सवाल

पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि दलित परिवारों की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर उन्हें बेघर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायत के अनुसार जिस समय जमीन की खरीद-बिक्री हुई, उस समय दामोदर मिश्रा की उम्र करीब 13 वर्ष थी, फिर भी उन्हें पहचानकर्ता (पहचान गवाह) बनाया गया। विधायक ने सवाल उठाया कि जब मां खरीदार थीं तो नाबालिग पुत्र पहचानकर्ता कैसे बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह सरकारी नियमों के विपरीत प्रतीत होता है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विधायक ने बताया कि मामले में पलामू के एसपी, डीएसपी एवं पांकी थाना पुलिस को त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।