सरकारी प्रोजेक्ट में बालू का ‘मिनी पहाड़’! प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
निजी सेक्टर के निर्माण में बालू के स्टॉक पर गिरिडीह जिला प्रशासन करता है बड़ी कार्रवाई, लेकिन गिरिडीह में बन रहे सरकारी प्रोजेक्ट के निर्माण में बालू के स्टॉक पर कोई निगरानी नहीं
गिरिडीह
बालू के अवैध कारोबार और भंडारण के खिलाफ गिरिडीह जिला प्रशासन की समय समय पर कड़ी कार्रवाई होती है। लेकिन कार्रवाई सिर्फ निजी सेक्टर तक सीमित है। सरकारी सेक्टर में जरूरत से अधिक भंडारण को रोकने को लेकर जिला प्रशासन कही से गंभीर नहीं है।
इसकी बानगी है 66 करोड़ के लागत से न्यू समाहरणालय के समीप बन रहा मेधा दूध डायरी प्लांट याेजना स्थल। जहां बालू का बड़ा स्टॉक जमा हुआ है। फिलहाल, इस स्टॉक पर जिला प्रशासन की कोई नजर नहीं। जबकि मेधा दूध डायरी प्लांट प्रोजेक्ट स्थल पर 1 हजार मीट्रिक टन के करीब बालू का स्टॉक जमा है। अब ये किसके निर्देश पर है। इसकी जानकारी खुद खनन विभाग तक को नहीं है। लेकिन मेधा दूध डायरी प्लांट प्रोजेक्ट स्थल पर निर्माण कार्य के लिए बालू का मिनी पहाड़ ही खड़ा है। ये naxatra न्यूज के विजुअल में भी दिख रहा है।
इस दौरान जब प्रोजेक्ट साइट पर जब कई कर्मियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। तो कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। हालांकि एक कर्मी ने बंद कैमरे के सामने इतना जरूर कहा कि बालू का स्टॉक गिरिडीह और बिहार दोनों स्थानों के नदियों से आया है।
इधर खनन विभाग के खनन निरीक्षक विश्वनाथ से इतने बड़े स्टॉक लेकर पूछा गया कि क्या किसी सरकारी प्रोजेक्ट को लेकर इतने बड़े पैमाने पर बालू के स्टॉक की अनुमति है तो खनन निरीक्षक विश्वनाथ कैमरे के सामने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए एक्ट से जुड़ा किताब खंगालने में जुट गए। लेकिन मेधा दूध डायरी प्लांट प्रोजेक्ट स्थल को लेकर बालू के स्टॉक से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिला।

