करमा गांव में राजा जमा मस्जिद में धूमधाम से मनाई गई बकरीद, आपसी भाईचारे का अनुपम मिसाल पेश किया

करमा (बिहार): बकरीद के पावन पर्व पर करमा गांव के ऐतिहासिक राजा जमा मस्जिद में सुबह 7 बजे सामूहिक नमाज अदा की गई। नमाज की इमामत मुफ़्ती एकबाल साहब ने की। मस्जिद में बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम भाई-बहन और आसपास के इलाकों के लोग जमा हुए और ईद की नमाज के बाद एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद की खुशियां साझा कीं।

मौके पर समाज सेवी और प्रमुख व्यक्तित्व अबुल हसन जुमन मियाँ ने सभी उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “बकरीद का त्योहार केवल कुर्बानी का नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है। हमें इस पावन अवसर पर अपने दिलों को साफ रखते हुए एक-दूसरे के साथ गले मिलना चाहिए और खुशियां बांटनी चाहिए। समाज में भाईचारा कायम रहे, तभी हमारा समाज मजबूत बनेगा।”

जुमन मियाँ ने आगे कहा कि बकरीद हमें इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद दिलाता है, जो अल्लाह की राह में हर प्रकार की कुर्बानी के लिए तैयार रहने का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस त्योहार को शांति, एकता और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाएं तथा किसी भी प्रकार की अफवाह या गलतफहमी से बचें।

नमाज के बाद मस्जिद परिसर में खुशियों का माहौल छा गया। लोग एक-दूसरे को बकरीद मुबारक कहते हुए गले लग रहे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस पर्व की खुशी में शामिल दिख रहे थे।

मौके पर उपस्थित प्रमुख लोग:

  • मकसूद आलम
  • करी
  • कुतबुद्दीन (युवा कपड़ा व्यवसायी)
  • शमशाद अंसारी
  • मरगुब अहमद
  • तहसीन रजा
  • सिपटें रजा
  • इसरार अहमद

समेत गांव के तमाम गणमान्य व्यक्ति और युवा इस आयोजन में शरीक हुए।

इस आयोजन को सफल बनाने में मस्जिद कमेटी और स्थानीय समाजसेवियों की सक्रिय भूमिका रही। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति और अनुशासन बना रहा। लोगों ने उम्मीद जताई कि करमा गांव में ऐसे सामूहिक कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से होते रहें, जिससे समाज में एकता और प्रेम की मिसाल कायम रहे।

बकरीद का यह उत्सव पूरे क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया जा रहा है। राजा जमा मस्जिद में हुई यह नमाज स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण और यादगार साबित हुई।