“निगम को जनता ने लूट की छूट नहीं दी” — तालाब बंदोबस्ती पर भड़के सन्नी शुक्ला

निगम को जनता ने लूट की छूट नहीं दी है: सन्नी शुक्ला

तालाब बंदोबस्ती में भारी राजस्व वृद्धि का जबरदस्त विरोध, नगर निगम पर मनमानी का आरोप

मेदिनीनगर, नगर निगम द्वारा तालाबों की बंदोबस्ती में अचानक 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व वृद्धि किए जाने को लेकर मछुआरा समाज और झामुमो नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है। झामुमो नेता सन्नी शुक्ला के नेतृत्व में झामुमो नेता आशुतोष विनायक तथा मत्स्यजीवी सदस्य मुकेश चौधरी ने नगर निगम पर गरीब मछुआरों के अधिकार छीनने और तालाबों को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने की साजिश का आरोप लगाया है। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने पलामू उपायुक्त को शिकायत भी सौंप दी है।
नेताओं ने कहा कि नगर निगम को मत्स्य विभाग और जल संसाधन विभाग द्वारा संबंधित तालाब अब तक हस्तांतरित नहीं किए गए हैं, इसके बावजूद निगम ने खुले डाक के माध्यम से बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखकर की जा रही है।
झामुमो नेताओं ने बताया कि नगर विकास विभाग द्वारा जारी संकल्प संख्या 511, दिनांक 11 फरवरी 2021 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी भी तालाब की बंदोबस्ती में पहला अधिकार स्थानीय मत्स्य पालक समिति का होगा। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा इस नियम की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि झरनाहार तालाब का वार्षिक राजस्व, जो पहले मात्र 7 हजार रुपये था, उसे बढ़ाकर 2 लाख 20 हजार रुपये कर दिया गया। इसी तरह बड़काबांध तालाब, जिसका वार्षिक राजस्व 20 हजार रुपये था, उसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया। वहीं माइनर रेगुलेशन तालाब(कचरवा डैम), जिसकी बंदोबस्ती पहले 42 हजार रुपये में होती थी, उसे 55 लाख रुपये में खुले डाक में निकाला गया है। नेताओं का कहना है कि इतनी भारी वृद्धि के कारण गरीब मछुआरे तालाब लेने में असमर्थ हो जाएंगे, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी और भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गरीब मछुआरों को तालाबों से दूर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की सुनियोजित साजिश है। झामुमो नेताओं और चौधरी समाज ने चेतावनी देते हुए कहा है इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगना चाहिए।