महंगाई और बेरोज़गारी पर सरकार जवाब दे : अमित रंजन तिवारी

महंगाई और बेरोज़गारी पर सरकार जवाब दे: अमित रंजन तिवारी

गढ़वा :–देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ आम जनता बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक असुरक्षा से परेशान है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए रोज़मर्रा का जीवन कठिन होता जा रहा है, उक्त बाते गढ़वा जिलाध्यक्ष कांग्रेस कमिटी के जिला महासचिव अमित तिवारी ने कही है।
उन्होंने कहा की युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं और छोटे व्यापारी लगातार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। लेकिन इन ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार के द्वारा जनता को ‘मिशन 2047’ जैसे दूरगामी सपनों का नैरेटिव परोसा जा रहा है।

राजनीति विज्ञान में इसे ‘The Politics of Deferred Accountability कहा जाता है, अर्थात जवाबदेही को भविष्य के नाम पर टाल देना। जब वर्तमान के गंभीर संकटों पर केंद्र सरकार के पास कोई ठोस जवाब न हों, तब जनता का ध्यान 20-25 साल आगे के सपनों की ओर मोड़ दिया जाता है, ताकि आज के सवालों से बचा जा सके। जनता से कहा जाता है कि “देश अमृतकाल में है” और “भविष्य सुनहरा होगा”, लेकिन वर्तमान की कठिनाइयों पर कोई स्पष्ट समाधान दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा की इतिहास इस प्रकार की राजनीति का गवाह रहा है। 1930 से 1960 के दशक के बीच सोवियत संघ में जब आम जनता रोटी, कपड़े और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही थी, तब वहाँ की सत्ता जनता को 1980 का सपना दिखा रही थी। लेकिन जब वर्तमान की वास्तविक समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, तब वह मॉडल अंततः 1991 में बिखर गया।
इतिहास हमें यह सिखाता है कि केवल दूर के सपनों से राष्ट्र मजबूत नहीं बनते, बल्कि वर्तमान की मजबूत नीतियों, जवाबदेही और जनता के विश्वास से राष्ट्र आगे बढ़ते हैं।

भविष्य की चमक दिखाकर आज की मूलभूत परेशानियों को ‘देशभक्ति’, ‘बलिदान’ और ‘राष्ट्रहित’ के नाम पर दबाया जा रहा है और जनता से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह वर्तमान के संकटों पर सवाल पूछना बंद कर दे|

देश का युवा आज नौकरी चाहता है, किसान अपनी फसल का उचित मूल्य चाहता है, मध्यम वर्ग महंगाई से राहत चाहता है और आम नागरिक बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सुरक्षा चाहता है। यदि वर्तमान की इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो केवल बड़े-बड़े विज़न डॉक्यूमेंट और नारों से देश मजबूत नहीं बन सकता।

केंद्र की भाजपा सरकार को चाहिए कि वह भविष्य की योजनाओं के साथ-साथ वर्तमान की वास्तविक समस्याओं पर भी गंभीरता से काम करे। लोकतंत्र में जनता केवल सपने नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिणाम भी मांगती है।