खंडोली डैम में मत्स्य पालन से बदली ग्रामीणों की तस्वीर, 200 लोगों को मिला रोजगार

गिरिडीह खंडोली डैम में मत्स्य पालन बना ग्रामीणों की आय का मजबूत आधार, केज कल्चर से प्रतिदिन 1 क्विंटल मछली उत्पादन, 200 लोगों को मिला रोजगार

गिरिडीह। जिले के बेंगाबाद प्रखंड अंतर्गत खंडोली, भोजदाहा और लालपुर क्षेत्र में मत्स्य पालन ग्रामीणों के लिए रोजगार और आमदनी का मजबूत जरिया बनकर उभरा है। मत्स्य विभाग की पहल और सरकारी सहयोग से यहां बड़े पैमाने पर केज कल्चर और हेचरी के माध्यम से मछली उत्पादन किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार खंडोली क्षेत्र में लगभग 200 से अधिक केज में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। मत्स्य विभाग की ओर से मछली चारे पर प्रति किलो 25 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण, फीडिंग और देखरेख से संबंधित सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। करीब सात महीनों तक मछलियों को तैयार करने के बाद यहां प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल तक मछली उत्पादन हो रहा है।

खंडोली में रेहु, कटला, तेलपिया, गोल्डन, चिटल और छोटे झींगा समेत कई प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। यहां अब तक 30 किलो तक की बड़ी मछलियां भी तैयार हो चुकी हैं। वहीं हेचरी के माध्यम से हर वर्ष करीब 11 करोड़ मछलियों का बीज तैयार किया जाता है, जिससे गिरिडीह समेत आसपास के कई जिलों के मछुआरों को लाभ पहुंच रहा है।

स्थानीय किसान तैयब अंसारी, कमरुदिन, लतीफ, क्यूंम और लखन रजक ने बताया कि मत्स्य पालन के कारण गांव के करीब 50 घरों और लगभग 200 लोगों को रोजगार मिला है। बड़े स्तर पर कार्य करने वाले लोगों की मासिक आय लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच रही है, जबकि छोटे स्तर के मछुआरों के लिए विभाग की ओर से निःशुल्क खंडोली डैम में मछली बीज को डाला जाता है, जिसका लाभ आसपास के गांवों छोटे मछुआरे को मिलता है।जिससे छोटे मछुआरे भी प्रतिमाह करीब 10 से 15 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और मत्स्य विभाग के सहयोग से गांव में स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। इससे बेरोजगारी कम हुई है और लोग खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी आय का स्थायी स्रोत बना रहे हैं।