विश्व को युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए वहीं मजदूरों को 44 श्रम संहिता: शत्रुघ्न कुमार शत्रु

विश्व को युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए वहीं मजदूरों को 44 श्रम संहिता: शत्रुघ्न कुमार शत्रु

झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष सह मजदूर किसान कामगार यूनियन झारखण्ड के सचिव सह प्रवक्ता शत्रुघ्न कुमार शत्रु ने आज मेदिनीनगर के बजराहा स्थित माता रमाबाई अंबेडकर होस्पीटल के उद्घाटन अवसर पर करुणा के सागर महामानव तथागत गौतम बुद्ध के 2589 वीं जयन्ती व अन्तर्राष्ट्रीय श्रम दिवस पर आयोजित विशाल समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज मध्य पूर्व एशिया, रुस-यूक्रैन अथवा वियतनाम-कंबोडिया जैसे देशों में मानवता के खिलाफ युद्ध नहीं बल्कि करुणा,दया व प्रेम के सागर तथागत गौतम बुद्ध के विचारों व दर्शन को अपना कर विश्व शांति स्थापित करने की जरूरत है।
आज इंटरनेशनल लेबर डे के अवसर पर शिकागो के श्रम नायक शहीदों को सलाम अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत सरकार के अंदर अगर थोड़ी भी नैतिकता बची है तो महिला व पुरुष श्रमिकों के महानतम मसीहा संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ बी०आर०अम्बेडकर जी द्वारा संविधान में मजदूर हितों के लिए प्रावधानित 44 श्रम संहिताओं को फिर से लागू कर मजदूर हितैषी होने का परिचय दे।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कामेश्वर कुशवाहा बौद्ध व संचालन राजु रजक ने किया, वहीं कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संत मरियम स्कूल के निदेशक व प्रख्यात शिक्षाविद् अविनाश देव व मुख्य वक्ता के रूप में अम्बेडकर चेतना परिषद के संस्थापक डा०विजय कुमार त्रिशरण ने विस्तार से भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें स्मरण व नमन किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आर०बी०एम ०महिला मोर्चा कै राष्ट्रीय अध्यक्ष सुषमा बौद्ध, राष्ट्रीय महासचिव रामप्रसाद बौद्ध,प्रदेश अध्यक्ष रामलाल बौद्ध, प्रभारी रामजी बौद्ध ,झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार शत्रु, समेत पलामू गढ़वा के प्रबुद्ध उपासक/उपासिका भारी संख्या में उपस्थित थे,जिन्हें आर०बी०एम० के मुख्य महासचिव रवि पाल के नेतृत्व में पंचशील का पट्टा देकर सम्मानित किया गया।

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