संस्कारों की छांव में खिलखिलाया बचपन: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर गुमला में दादा-दादी, नाना-नानी का भव्य सम्मान
संस्कारों की छांव में खिलखिलाया बचपन: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर गुमला में दादा-दादी, नाना-नानी का भव्य सम्मान
गुमला – विद्या भारती योजना के अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर गुमला में दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह का भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नन्हे विद्यार्थियों को पारिवारिक संस्कारों और भारतीय मूल्यों से जोड़ना रहा।
समारोह का शुभारंभ प्रबंधन समिति के सचिव विजय बहादुर सिंह, प्रधानाचार्य जितेंद्र तिवारी तथा मुख्य अतिथि लक्ष्मी नारायण सिंह एवं मीना देवी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद वाटिका वर्ग के बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब बच्चों ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी को तिलक लगाकर, मिष्ठान खिलाकर और चरण वंदन कर सम्मानित किया। अपने पोते-पोतियों के स्नेह से अभिभूत बुजुर्गों की आंखें नम हो उठीं।
प्रधानाचार्य जितेंद्र तिवारी ने कहा कि बुजुर्ग हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं और नई पीढ़ी तक संस्कार पहुँचाने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सचिव विजय बहादुर सिंह ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में उपेक्षित महसूस कर रहे बुजुर्गों को ऐसे आयोजन परिवार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। मुख्य अतिथि लक्ष्मी नारायण सिंह ने पहल को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम हर विद्यालय में होने चाहिए।
कार्यक्रम का मंच संचालन उमा कुमारी ने किया, अतिथि परिचय विकास कुमार ने कराया, जबकि आचार्य अर्चना मिश्रा की आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह ने बच्चों और बुजुर्गों के बीच स्नेह, सम्मान और संस्कार का सुंदर सेतु स्थापित किया।




