सवर्ण समाज को भी मिले योजनाओं और कानून में बराबरी का हक : संजीव

सवर्ण समाज को भी मिले योजनाओं और कानून में बराबरी का हक : संजीव
अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष संजीव सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आज सवर्ण समाज अपने ही देश में धीरे-धीरे दोयम दर्जे का नागरिक बनता जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज किसी भी वर्ग या समुदाय का विरोध नहीं करता है। बल्कि हमारी मांग यह है कि जिस प्रकार एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए विशेष कानून और विकास के लिए बजट निर्धारित किए जाते हैं, उसी प्रकार सवर्ण समाज के लिए भी कानून और अलग बजट का प्रावधान होना चाहिए।
संजीव सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लागू की जा रही सभी योजनाओं में सवर्ण समाज को भी बराबरी का हक और अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि अब सवर्ण समाज को केवल 10% आरक्षण के झांसे में नहीं रखा जा सकता। देश की कुल आबादी में सवर्ण समाज की भागीदारी लगभग 40% है, इसलिए उन्हें भी कानून और योजनाओं में समान अधिकार मिलना आवश्यक
श्री संजीव सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में यूजीसी से जुड़े मामले में 19 मार्च तक स्टे लगाए जाने के बाद देशभर के सवर्ण समाज को उम्मीद थी कि न्यायालय द्वारा उनके हित में कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। किंतु अब तक इस मामले में किसी प्रकार का ठोस फैसला नहीं आने से सवर्ण समाज में गहरी निराशा और हतोत्साह का माहौल है।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से यह प्रतीत होता है कि मामले को अनावश्यक रूप से लंबित रखकर ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्याय की भावना के विपरीत है। देश का सवर्ण समाज अब अपने अधिकारों को लेकर पूरी तरह सजग और जागरूक हो चुका है।
श्री सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि यूजीसी की इस व्यवस्था को वापस नहीं लिया गया और राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं में सवर्ण समाज को समान रूप से अधिकार और हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो समाज अपने हक, अधिकार और सुरक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष करने को बाध्य होगा।
उन्होंने आगे कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री हिंदू समाज की एकता की बात करते हैं और “एक रहोगे तो सुरक्षित रहोगे” का संदेश देते हैं, वहीं दूसरी ओर सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी कर ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
अंत में श्री सिंह ने प्रधानमंत्री से नम्र अपील की कि यूजीसी से संबंधित इस नियमावली को पूर्ण रूप से वापस लिया जाए तथा सवर्ण समाज को भी सभी सरकारी योजनाओं में समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि समाज में समरसता और संतुलन बना रह सके।