गढ़वा: झारखंड छात्र मोर्चा ने UGC के “इक्विटी रेगुलेशंस” का कड़ा विरोध किया
झारखंड छात्र मोर्चा, गढ़वा के जिलाध्यक्ष निशांत चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह नियमावली समानता के नाम पर तानाशाही नियंत्रण राज्यों के अधिकारों में कटौती और उच्च शिक्षा के संघीय ढांचे को तोड़ने की कोशिश है। निशांत चतुर्वेदी ने कहा कि मोदी सरकार लगातार शिक्षा को दिल्ली से संचालित करने की मानसिकता के तहत ऐसे नियम ला रही है, जिनका ज़मीन से कोई सीधा सरोकार नहीं है। इक्विटी एक संवेदनशील और ज़रूरी विषय है, लेकिन उसके नाम पर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना और हर संस्थान को UGC के नियंत्रण में देना लोकतांत्रिक सोच नहीं, बल्कि तानाशाही रवैया है।स्थानीय ज़रूरतों, भाषाई विविधता और सामाजिक संरचना को नज़रअंदाज़ कर बनाया गया यह केंद्रीय ढांचा असल में भारत को शैक्षणिक एवं सामाजिक रूप से टुकड़ों में बाँटने का खेल बुन रहे है।उन्होंने यह भी कहा कि इक्विटी सेल जैसे प्रावधान, बिना स्पष्ट परिभाषा और जवाबदेही के, राजनीतिक और वैचारिक हस्तक्षेप का औजार बन सकते हैं, जिससे कैंपस में अस्थिरता और डर का माहौल बनेगा। कैंपस के शिक्षा सुधार को केंद्रीकरण नहीं संसाधन और अवसर बढ़ाने की दिशा में ले जाया जाए सरकार। किसी ने माँगा नहीं था, फिर भी भाजपा सरकार ने UGC के माध्यम से एक ऐसा नियम थोप दिया है, जो हर कॉलेज और विश्वविद्यालय के परिसर में सामान्य वर्ग के छात्रों को खुलेआम निशाना बनाने का रास्ता खोल रहा है। ये कमिटी ‘समानता स्क्वाड’ की तरह काम करेगी, जो कैंपस में घूम-फिरकर शिकायतें इकट्ठा करेगी। एक भी शिकायत मिली नहीं कि सामान्य वर्ग के छात्र को तुरंत दोषी ठहरा दिया जाएगा।वही दूसरी ओर फर्जी शिकायत करने वाले को कोई सजा जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, जबकि आरोपी सामान्य वर्ग का छात्र मानसिक यातना, अपमान और कैरियर बर्बादी झेलता रहेगा। हमने पहले यह देखा कि SC/ST एक्ट के तहत 99 प्रतिशत मामले फर्जी साबित होते हैं। यह ठीक वैस अब UGC के इस नियम में सामान्य वर्ग के हर लड़के को ‘आक्रांता’ और ‘भेदभाव करने वाला’ मान लिया गया है। यह नियम छात्रों को भी अपराधी घोषित कर देगा। एक छोटी-सी शिकायत से निलंबन, जांच और सामाजिक बहिष्कार तक की नौबत आ सकती है।

