सनातन धर्म आस्था से चलता है , पाखंड से नही -निशांत चतुर्वेदी
सनातन धर्म आस्था से चलता है , पाखंड से नही -निशांत चतुर्वेदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही मे युवाओं से आह्वान करते हुए हमारे सनातन धर्मग्रंथ को किस्से कहानियाँ कह कर संबोधित किया जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
रामायण और महाभारत को किस्से–कहानियाँ कहकर संबोधित करना केवल अज्ञानता नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का खुला अपमान है। रामायण और महाभारत कोई मनोरंजन साहित्य नहीं, बल्कि इस देश की नैतिक चेतना, सामाजिक मर्यादा और जीवन-दर्शन के मूल स्तंभ हैं।
दुखद यह है कि जिन लोगों को स्वयं को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा ठेकेदार घोषित करने की आदत है, वही लोग ऐसे अपमानजनक बयानों पर या तो मौन साध लेते हैं या सुविधाजनक चुप्पी ओढ़ लेते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि इस पूरे प्रकरण पर तथाकथित हिंदू संगठन जो चुनाव के समय गिरगिट को गोह बनाते फिरते है वे सभी मौन है और अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। और इससे भी बड़ा विडंबनापूर्ण दृश्य यह है कि हाल ही में सार्वजनिक रूप से हिंदू धर्म में देवता हैं, जिन्हें भगवान राम का परम भक्त, शक्ति, साहस, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है वैसे भगवान हनुमान को पतंग बनाकर उड़ाया गया तब भी कथित धर्मरक्षकों की आस्था कहीं हवा में ही उड़ती नजर आई। सवाल यह है कि क्या धर्म और आस्था केवल राजनीतिक लाभ के समय ही याद आती है? मर्यादा पुरुषोत्तम राम, श्रीकृष्ण और हमारे धर्मग्रंथों का सम्मान किसी व्यक्ति, पार्टी या संगठन से बड़ा है। हिंदू धर्म किसी के प्रमाण-पत्र का मोहताज नहीं है और न ही उसे स्वयंभू ठेकेदारों की जरूरत है।
आज सच यह है कि हिंदू खतरे में किसी और से नहीं बल्कि उस दोहरे चरित्र से है जो एक ओर धर्म की राजनीति करता है और दूसरी ओर धर्म के अपमान पर चुप्पी साध लेता है। हम मांग करते हैं कि इस विषय पर सभी तथाकथित हिंदू संगठनों को स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से अपना रुख सामने रखना चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि उनकी आस्था वास्तविक है या केवल चुनावी और अवसरवादी।

