महुआडांड में नक्सल प्रभावित क्षेत्र की युवतियों के लिए सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

अक्सी में सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की 32 युवतियों को मिलेगा 25 दिवसीय प्रशिक्षण

महुआडांड प्रखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों की युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल करते हुए आज 03 जनवरी 2026 को “एफ” समवाय बांसकर्चा द्वारा वित्तीय वर्ष 2025–26 के नागरिक कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत धुमकुडिया सह आदिवासी सांस्कृतिक भवन, अक्सी में सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री राजेश सिंह, कमांडेंट 32वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, लातेहार, श्री सम्राट दिव्यजीत चंद्रजीत, उप-कमांडेंट 32वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, लातेहार एवं “एफ” समवाय बांसकर्चा के निरीक्षक (सामान्य) श्री विकास चन्द्र घोष ने संयुक्त रूप से किया।इस अवसर पर अक्सी पंचायत की मुखिया श्रीमती रोजालिया टोप्पो, पूर्व मुखिया श्रीमती ब्रीजनिया कुजूर, महुआडांड थाना के उप-निरीक्षक श्री अरविन्द हेरेंज तथा प्रधान श्री मार्शल बेक सहित कई गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत महुआडांड प्रखंड के नक्सल प्रभावित गांवों लाखेपुर, जाता, बांसकर्चा, अक्सी, महुआडांड एवं कुरकिल से चयनित 32 युवतियों को 25 दिनों तक सिलाई का व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवतियों को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना एवं समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।प्रशिक्षण M/S NIRAJ ENTERPRISES AND COMMERCIAL TRAINING CENTRE, एस.पी. कॉलेज रोड, दुमका (पिन-814101) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी युवतियों को आधुनिक सिलाई मशीनों का उपयोग, कपड़ा कटिंग, डिज़ाइनिंग तथा स्वरोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में महिलासशक्तिकरण और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे युवतियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे घर बैठे सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकती हैं।स्थानीय ग्रामीणों एवं युवतियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए सशस्त्र सीमा बल के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम क्षेत्र में शांति, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।