नेतरहाट में गहराया स्वच्छता संकट, तीन माह से हड़ताल पर सफाईकर्मी

कचरे के ढेर से बदहाल हुई “झारखंड की रानी”, पर्यटन पर मंडराया खतरा

महुआडांड़ : झारखंड की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी और “झारखंड की रानी” के नाम से मशहूर नेतरहाट इन दिनों गंभीर स्वच्छता संकट से जूझ रही है। नगर क्षेत्र के सफाईकर्मी पिछले तीन महीनों से हड़ताल पर हैं, जिससे पूरे इलाके की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।सूत्रों के अनुसार, करीब 60 सफाईकर्मियों को पिछले छह महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। बार-बार संबंधित विभाग और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो मजबूर होकर सफाईकर्मियों ने काम बंद कर दिया।हड़ताल का असर अब हर गली-मोहल्ले और पर्यटन स्थलों पर साफ दिखाई देने लगा है। पर्यटन सीजन के चलते बड़ी संख्या में सैलानी नेतरहाट पहुंच रहे हैं, जिससे कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। लेकिन सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण सड़क किनारे, जंगलों के भीतर, मोड़ों पर और प्रमुख दर्शनीय स्थलों के आसपास कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। प्लास्टिक बोतलें, खाने-पीने के पैकेट और अन्य अपशिष्ट खुले में पड़े हुए हैं, जो पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जंगल क्षेत्र और सड़क किनारे फैला कचरा नेतरहाट की प्राकृतिक सुंदरता को गहरी चोट पहुंचा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर पर्यटन व्यवसाय पर पड़ेगा और नेतरहाट की पहचान को भारी नुकसान होगा।सफाईकर्मियों का कहना है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर कई बार प्रशासन से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। वहीं, प्रशासन की चुप्पी ने हालात को और गंभीर बना दिया हैस्थानीय नागरिकों, व्यवसायियों और पर्यटकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सफाईकर्मियों का बकाया मानदेय तत्काल भुगतान किया जाए, हड़ताल समाप्त कराई जाए और नेतरहाट की स्वच्छता व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल की गरिमा और आकर्षण बरकरार रह सके।