संत रविदास भारतीय सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत
संत रविदास भारतीय सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत चंदन पांडे,गिरिडीह
गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह में आई. क्यू. ए. सी. के तहत हिंदी विभाग के सौजन्य से 23.02.24 को संत रविदास की स्मृति में ‘संत रविदास का महत्व’ विषय पर विभागीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उल्लेखनीय है कि 24.02.24 को रविदास जयंती होने के कारण कॉलेज बंद है।
इस संगोष्ठी में स्नातक प्रथम समसत्र और बी. एड. के विद्यार्थियों की सराहनीय सहभागिता रही। कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अनुज कुमार ने संत रविदास को सहज का साधक निर्गुनिया कवि बतलाया।
राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष श्री बालेंदु शेखर त्रिपाठी ने कहा कि संत रविदास की बानी में समतामूलक समाज का स्वप्न है। इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.धनेश्वर रजक ने रविदास के साथ साथ संत गाडगे की वैचारिक पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने सताईस वर्षों के अनुभव के आधार पर कहा कि कॉलेज में रविदास पर यह पहली संगोष्ठी है।
इस अवसर पर साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में दिलचस्पी रखने वाले श्री शंकर पांडेय ने संत रविदास को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का अग्रदूत कहा।
बी एड के सहायक प्रोफेसर श्री धर्मेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि रविदास जैसे अनेक संत और विचारक हुए हैं जिनकी समाज को मानवीय बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है और ऐसे लोगों पर आज विमर्श की जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ.बलभद्र सिंह ने किया। संचालन के दरम्यान उन्होंने कहा कि भारतीय समाज और संस्कृति की निर्मित में मध्यकालीन संतों की जबर्दस्त भूमिका रही है। रैदास, कबीर, मीरा, दादू आदि के पद जनमानस में आज भी सुरक्षित हैं। भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास को इनके पदों के हवाले समझा जाने लगा है।
इस अवसर पर हिंदी प्रथम समसत्र के अनुराग सागर, सलोनी कुमारी, शिवानी कुमारी, आरती कुमारी, राधिका कुमारी, सागर कुमार राना ; बी. एड .के अजय कुमार रजक,सोनी कुमारी, श्वेता कुमारी, राजकुमार राणा, संदीप कुमार, नीतीश कुमार ने संत रविदास के पदों के पाठ करते हुए उनके अर्थ और संदर्भ पर प्रकाश डाला। बी एड की सहायक प्रोफेसर आशा रजवार पूरे कार्यक्रम में गंभीर श्रोता की भूमिका में रहीं। आई. क्यू. ए. सी. के संयोजक डॉ. एम. एन.सिंह ने इस आयोजन के लिए बधाई दी।
