वट सावित्री पूजा को लेकर गिरिडीह के बाजारों में दिखी रौनक

गिरिडीह। वट सावित्री पूजा को लेकर गिरिडीह के बाजारों में शुक्रवार को खासा उत्साह और चहल-पहल देखने को मिली। शहर के विभिन्न बाजारों, श्रृंगार दुकानों, कपड़ा दुकानों और पूजा सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं पूजा के लिए सोलह श्रृंगार, नई साड़ियां, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, महावर, पायल, पूजा की डलिया, फल-फूल और वट वृक्ष की पूजा सामग्री की खरीदारी करती नजर आईं।
गिरिडीह के बड़ा चौक, टावर चौक, मकतपुर, कालीबाड़ी रोड समेत कई बाजारों में दिनभर खरीदारी का माहौल बना रहा। दुकानदारों के अनुसार वट सावित्री पूजा को लेकर सुबह से ही महिलाओं की भीड़ लगी रही और शाम तक बाजार गुलजार रहे।
मान्यता है कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। शनिवार सुबह महिलाएं स्नान-ध्यान कर सोलह श्रृंगार करेंगी और वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा अर्चना करेंगी। पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर पति की दीर्घायु की प्रार्थना करेंगी।
वट सावित्री पूजा का संबंध पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजकुमारी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद यह ज्ञात हुआ कि सत्यवान की आयु बहुत कम है।
एक दिन सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए, जहां अचानक उनकी मृत्यु हो गई। यमराज उनके प्राण हरकर ले जाने लगे। तब पतिव्रता सावित्री ने दृढ़ संकल्प और अपने तप-बल से यमराज का पीछा किया। सावित्री की निष्ठा, बुद्धिमानी और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने चतुराई से पहले अपने सास-ससुर की खुशहाली और फिर संतान का वरदान मांगा। अंततः यमराज को सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पड़े।
तभी से वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष सुहागिन महिलाएं पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पर्व को मनाती हैं।