तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही बस में लगी भीषण आग

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दुमका। झारखंड के दुमका जिले के विभिन्न प्रखंडों से 70 तीर्थयात्रियों को लेकर अयोध्या व काशी विश्वनाथ दर्शन पर निकली बस (यूपी 62 एटी 7070) में शुक्रवार की अहले सुबह करीब तीन बजे वाराणसी जिले बौलिया महेशपुर के समीप आग लग गयी. जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय सभी यात्री सो रहे थे. ड्राइवर भी आग लगने से बेखबर था. यात्रियों के बाहर निकलने के कुछ ही मिनट बाद बस आग के गोले की तरह धूं-धूं कर जलकर खाक हो गयी. इस बस पर जरमुंडी प्रखंड के बरगो गांव के 12 यात्री शामिल थे.

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तुषार बस सर्विस की यह बस सभी तीर्थयात्रियों को लेकर दुमका से 19 मार्च को निकली थी. बस के यात्रियों ने बताया कि वे लोग अयोध्या में दर्शन पूजन कर वापस लौट रहे थे. शुक्रवार की सुबह अचानक बस में आग लग गयी. जब बस को रुकवायी गयी, तब तक आग की लपटें तेज हो गयी थीं. इसके बाद उत्तर प्रदेश (यूपी) पुलिस ने जवानों ने इसकी सूचना अधिकारियों व पुलिसकर्मियों को दी.

फायर ब्रिगेड की मदद से पुलिस टीम ने बस से सभी यात्रियों को सकुशल बाहर निकाला. फायर ब्रिगेड ने आग पर तो काबू पा लिया, लेकिन तब तक पूरी बस जलकर खाक हो चुकी थी. यात्रियों ने बताया कि हमलोगों की जान तो बच गयी लेकिन बस में रखे हमलोगों के सामान व रुपये जलकर बर्बाद हो गया. यूपी के अधिकारी ने सभी दर्शनार्थियों को बिस्किट, चाय तथा बोतलबंद पानी की व्यवस्था की. सुबह का नाश्ता करवाया व दोपहर का भोजन भी पैक करवा कर सभी यात्रियों को दिया.

शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे बरगो गांव निवासी एक तीर्थयात्री ने घटना की जानकारी देवव्रत मंडल को दी. सांसद प्रतिनिधि जयप्रकाश मंडल व देव्रव्रत मंडल ने सांसद डॉ निशिकांत दुबे से संपर्क कर उन्हें घटना की जानकारी दी. इसके बाद सांसद डॉ निशिकांत ने त्वरित पहल करते हुए, उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री और बनारस के कमिश्नर से यात्रियों को मदद करने की बात कही.

इसके बाद घटना स्थल पर यूपी के एडीएम, एसडीएम, एसएचओ, एआरटीओ सहित अन्य अधिकारी पहुंच गये. यात्रियों को आर्थिक मदद की दिलवायी गयी. सभी का मेडिकल चेकअप भी हुआ. इसके बाद खाना खिलाकर दूसरी बस से गंतव्य की ओर भेज दिया. सभी यात्री दुमका लौट रहे हैं.

तीर्थयात्रियों ने बताया कि बस में सवार जरमुंडी के यात्री भूधर चंद्र मंडल व दुमका के नेपाल मांझी की तबीयत बिगड़ गयी थी. उनको शुगर व बीपी की समस्या थी. जिन्हें काशी विद्यापीठ स्वास्थ्य केंद्र के डॉ प्रवेश मौर्य ने जांच कर दवा दी. डॉक्टरों की छह सदस्यीय टीम ने सभी यात्रियों का इलाज किया.

 

 

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