पिपरा कला में कजरी गायन से सजी सावन की शाम, लोकगीतों पर झूमे संगीतप्रेमी

कजरी गायन से गुलजार हुआ पिपरा कला

लोगों ने सावन महीने के अंत में कजरी का जमकर लिया आनंद।

गढ़वा पिपरा कला स्थित डॉ लालमोहन मिश्र के आवास पर शनिवार के शाम संगीतमय सुंदरकांड का पाठ तथा सावन महीने का परंपरागत लोकगीत “कजरी” गायन कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसका लोगों ने जमकर आनंद लिया। धार्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में शहर के बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी तथा धर्म प्रेमी महिला पुरुष शामिल हुए।शाम 5:00 बजे से 7:00 तक मंगल भवन अमंगल हारी के साथ सुंदरकांड का पाठ किया गया जिसमें पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में मातृ शक्ति भी शामिल थी।मंडली के गायक अमरेंद्र कुमार मिश्र मनोज दुबे राकेश तिवारी बनारसी पांडे द्वारकानाथ पांडे सतीश चौबे सुरेश मानस अनिल ओझा राजेश मिश्र मुकेश तिवारी धर्मेंद्र मिश्र श्रवण शुक्ल उमेश शर्मा चंपा देवी एनिमा देवी बिंदु देवी चंद्रावती देवी अनीता शर्मा आस्था सौम्या वैभव प्रतीक आयुष आदि रे सुंदरकांड का पाठ किया। पाठ की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी जमा हुए मानस मंडली के मुख्य गायक अरुण दुबे भक्ति रस में कजरी गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। डॉक्टर लालमोहन मिश्र द्वारा”सखी रे श्याम घर नहीं आए बदरा बरसन लगे ना”घिरी आए सावन में बदरिया,कजरिया कैसे खेलब ननदी” गायन पर लोगों ने जमकर आनंद लिया।मार्कंडेय तिवारी ने झूला लगे कदम के डारी झूले कृष्ण मुरारी ना,अरुण दुबे द्वारा,ओ भोले भंडारी बनके ब्रिज की नारी गोकुल में आ गए, प्रस्तुत किया इसके अलावा मनोज दुबे,अरविंद तिवारी,आदि लोगों ने भी कजरी गाकर लोगों को खूब झुमाया।डी ए भी स्कूल के संगीत शिक्षक पीके मिश्र मनोज सिन्हा, आत्मा पांडे ब्रजेश पांडे धर्म सिंह पांडे विजय शर्मा चंद्र मोदी जी किशोर ओझा राजू विश्वकर्मा बबलू पांडे गोपाल सोनी अशोक सिंह बृजमोहन प्रसाद सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।