मझिआंव सीओ प्रमोद कुमार निलंबित — दफ्तर में शराबखोरी, मारपीट और अनुशासनहीनता के आरोप साबित

गढ़वा शहर – अंचल कार्यालय में शराब पीने, लोगों से मारपीट करने के आरोप में मझिआंव सीओ सस्पेंड
सरकारी क्वार्टर में गैर महिला के साथ रंगरेलिया मनाने को लेकर भी चर्चा में रहे हैं सीओ प्रमोद कुमार

गढ़वा : सरकारी क्वार्टर में गैर महिला के साथ रंगरेलिया मनाते पत्नी द्वारा पकड़े जाने से चर्चा में आये मझिआंव के अंचल पदाधिकारी प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया गया है. उनके उपर निलंबन की यह कारवाई कार्मिक विभाग झारखंड सरकार की ओर से की गयी है. लेकिन यह निबंधन गैर महिला के साथ सरकारी क्वार्टर में रंगरेलिया मनाने को लेकर नहीं की गयी है, बल्कि अंचल कार्यालय में आये लोगों के साथ दुर्व्यवहार व मारपीट करने, अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुये धमकी देने, कार्यालय अवधि में शराब का सेवन करने, पैसे का लेनदेन करने तथा जनप्रतिनिधि के साथ समन्वय की कमी से संबंधित आरोपों के मद्देनजर की गयी है. इन मामलों को लेकर गढ़वा उपायुक्त दिनेश कुमार यादव की ओर से उनके खिलाफ आरोप गठित कर पत्रांक-430, दिनांक- 26 सितंबर 2025 को सरकार को पत्र प्रेषित किया गया था. इसके आलोक में यह कारवाई की गयी है. निलंबन अवधि में प्रमोद कुमार को दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय रांची में स्थानांतरित कर दिया गया है.मझिआंव प्रमुख ने डीसी को कराया था सीओ की करतूतों से अवगत
उल्लेखनीय है कि मझिआंव प्रखंड प्रमुख आरती दूबे ने इन सभी आरापों को लेकर उपायुक्त गढ़वा को 24 जुलाई 2025 को तीन अलग-अलग पत्र लिखे गये थे. इसमें उन्होंने अंचल कार्यालय में कार्यों को लेकर आनेवाले लोगों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार एवं मारपीट करने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया था. इसी तरह से दूसरे पत्र में आरती दूबे ने मझिआंव सीओ पर बिना विज्ञापन के ही अपने अंचल कार्यालय में कर्मियों की बहाली करने, बिना योग्यतावाले कर्मियों को भी बहाल करने आदि का आरोप लगाया गया था. तीसरे पत्र में श्रीमति दूबे ने सीओ पर यह आरोप लगाया था कि प्रखंड प्रमुख को राजस्व संग्रहण, भूमि रिकॉड, राजस्व विवाद आदि से संंबंधित मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है, लेकिन अंचल पदाधिकारी की ओर से उनके अधिकार से वंचित किया गया है. बताया गया कि प्रमुख की ओर से लगाये गये इन सभी आरोपों के मद्देनजर डीसी ने पूरे मामले की गहन जांच करायी थी. जांच में सत्य पाये जाने के पश्चात उनके खिलाफ सरकार को कारवाई के लिये अनुशंसा की गयी थी.

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