मेदिनीनगर में नावाटोली तालाब का मुद्दा गरमाया, जीर्णोद्धार की मांग तेज
एक का स्वार्थ नहीं, हज़ारों का हक़—यही हमारी लड़ाई – पूनम सिंह
जनता सड़कों पर, सवाल सीधे सत्ता से — नावाटोली तालाब पर अतिक्रमण बनाम शहर का हक
मेदिनीनगर।
आज नावाटोली, पलामू क्लब सहित आसपास के इलाकों में व्यापक जनसंपर्क के दौरान एक बात साफ होकर सामने आई—नावाटोली तालाब का जीर्णोद्धार शहर की सबसे बड़ी और सबसे लंबित ज़रूरत बन चुका है। हर गली, हर मोड़ पर लोगों ने एक ही सवाल उठाया: आखिर सालों से यह तालाब क्यों उपेक्षा का शिकार है?
जनता का आरोप है कि इस पूरे मामले की जड़ में एक प्रभावशाली व्यक्ति का कथित अवैध अतिक्रमण है, जो सत्ता के नशे में चूर होकर शहर के हितों को ताक पर रखे हुए है। लोगों का कहना है कि जैसे ही तालाब के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू होगी और जमीन की मापी होगी, उसी पल उस व्यक्ति के कार्यालय और व्यावसायिक भवन की सच्चाई सामने आ जाएगी—और इसी डर से वर्षों से इस जनहित के काम को रोका जा रहा है।
यह सिर्फ एक तालाब का मामला नहीं, बल्कि शहर के भविष्य और कानून के राज की परीक्षा है। एक व्यक्ति के निजी स्वार्थ के कारण हजारों नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक जलस्रोत बर्बाद पड़ा है। सत्ता या प्रभाव के बल पर सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा जमाए रखना न नैतिक है और न ही कानूनी।
जनसंपर्क के दौरान लोगों ने दो टूक कहा—अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। जनता की मांग है कि संबंधित भूमि की तत्काल मापी कराई जाए, सच्चाई को सार्वजनिक किया जाए और यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो दोषी पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही मेदिनीनगर नगर निगम से अपेक्षा है कि वह किसी दबाव में आए बिना शहर के हित में तुरंत जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराए।
पूरा पलामू जिला देख रहा है—यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर के हक, सम्मान और भविष्य के लिए है। अब फैसला साफ होना चाहिए: या तो कानून चलेगा, या फिर अतिक्रमण का डर।

