कधवन परियोजना स्थल पहुंचे सांसद राजाराम सिंह, सोन जल बंटवारे के बाद बढ़ी उम्मीदें
कधवन परियोजना की जमीन पर पहुंचे काराकाट सांसद, कांडी में सामाजिक एकता का दिया संदेश
राजाराम सिंह ने कांडी में कर्पूरी ठाकुर व जगदेव प्रसाद को किया नमन, सम्राट अशोक भवन का लिया जायजा; सोन जल बंटवारे के बाद परियोजना की संभावनाओं पर हुई चर्चा
कांडी/गढ़वा। सोन नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय कधवन जलाशय परियोजना को लेकर बिहार-झारखंड के बीच लंबे समय से चली आ रही अड़चनें दूर होने के बाद काराकाट सांसद राजाराम सिंह सोमवार को परियोजना क्षेत्र से जुड़े इलाकों के दौरे पर पहुंचे। उनके कांडी दौरे को इसी व्यापक जल संसाधन और क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांसद ने कांडी में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ क्षेत्र के लोगों से विकास के मुद्दों पर संवाद किया।
कांडी पहुंचने पर सांसद ने बाजार स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर और अमर शहीद जगदेव प्रसाद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने कुशवाहा समाज की ओर से निर्माणाधीन प्रियदर्शी सम्राट अशोक भवन का निरीक्षण किया। भवन के निर्माण की प्रगति की जानकारी लेने के साथ उन्होंने मौजूद लोगों से सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की।
सांसद ने कहा कि देश का लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था संविधान के मूल्यों पर टिकी है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को संविधान का सम्मान करते हुए समाज में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जात-पात और भेदभाव की दीवारों से ऊपर उठकर इंसानियत और मानवता को प्राथमिकता देना समय की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि समाज को आपसी विवाद में उलझाने के बजाय लोगों को एक-दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए। धर्म के नाम पर समाज को बांटने की प्रवृत्ति से बचते हुए प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता को मजबूत करना जरूरी है।
कांडी के बाद कधवन की ओर क्यों बढ़ा सांसद का रुख
सांसद ने बताया कि उनके दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य केतार प्रखंड के कधवन गांव में प्रस्तावित जलाशय स्थल का निरीक्षण करना है। कधवन परियोजना सोन नदी पर प्रस्तावित अंतरराज्यीय परियोजना है, जिसका संबंध सीधे बिहार और झारखंड के जल संसाधन से है। परियोजना के निर्माण से सोन नदी के अतिरिक्त मानसूनी पानी को संग्रहित कर सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और इंद्रपुरी बराज को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
यह परियोजना कोई नई योजना नहीं है। इसकी जड़ें कई दशक पुरानी हैं और लंबे समय तक बिहार-झारखंड के बीच पानी के बंटवारे तथा परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों से जुड़े सवालों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। वर्ष 2026 में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर बनी सहमति के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नए समझौते में बिहार के लिए 5.75 एमएएफ और झारखंड के लिए 2 एमएएफ पानी के हिस्से पर सहमति बनी है।
सिर्फ बांध नहीं, तीन राज्यों के भविष्य से जुड़ी परियोजना
कधवन जलाशय परियोजना का प्रभाव केवल गढ़वा और रोहतास तक सीमित नहीं माना जा रहा है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार प्रस्तावित जलाशय से झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुल 58 राजस्व गांव प्रभावित क्षेत्र में आ सकते हैं, जिनमें गढ़वा जिले के 12 गांव शामिल हैं। यही कारण है कि परियोजना के साथ पुनर्वास, भू-अर्जन और प्रभावित परिवारों के हित जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हैं।
दूसरी ओर, परियोजना के पूरा होने पर बिहार के सोन नहर तंत्र को अधिक स्थिर जल उपलब्ध कराने और बड़े क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाने की संभावना जताई गई है। ऐसे में कधवन जलाशय को केवल बांध निर्माण की योजना के रूप में नहीं, बल्कि सिंचाई, जल प्रबंधन, बिजली उत्पादन और अंतरराज्यीय जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ी बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
किसानों के लिए सिंचाई, क्षेत्र के लिए विकास की उम्मीद
सांसद ने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होने से किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिल सकता है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर खेती की निर्भरता केवल वर्षा पर नहीं रहेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने इंद्रपुरी के समीप सोन नदी के पानी के उपयोग से बिजली उत्पादन की प्रस्तावित योजना का भी उल्लेख किया। सांसद ने करीब 350 मेगावाट बिजली उत्पादन की बात कही। हालांकि उपलब्ध केंद्रीय परियोजना रिकॉर्ड में पुराने प्रस्ताव के तहत 300 मेगावाट की क्षमता दर्ज है और परियोजना का अंतिम स्वरूप डीपीआर व तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्थानीय समस्याओं को भी सांसद ने सुना
कांडी में स्थानीय लोगों और समाज के लोगों ने सांसद के समक्ष क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे रखे। लोगों ने सिंचाई, सड़क, बिजली तथा अन्य जनसमस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। सांसद ने कहा कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को संबंधित स्तर पर उठाकर समाधान की दिशा में पहल करने का प्रयास किया जाएगा।
सांसद के दौरे में एक ओर सामाजिक एकता और संविधान के मूल्यों की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर कधवन परियोजना जैसी बड़ी जल संसाधन योजना ने दौरे को क्षेत्रीय विकास के नजरिये से भी महत्वपूर्ण बना दिया। सोन नदी के पानी के बेहतर उपयोग और वर्षों से लंबित परियोजना के आगे बढ़ने की स्थिति में गढ़वा समेत आसपास के क्षेत्रों में इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में व्यापक हो सकता है।
इस दौरान कालीचरण मेहता, सुषमा मेहता, पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा, महानंद सिंह, रामप्यारे मेहता, लक्ष्मण मेहता, पूर्व मुखिया दामोदर मेहता, डॉ. शशि कुमार मेहता, नंदू मेहता समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।




