कांडी में 7 माह से पेंशन बंद, भोजन-दवा को तरस रहे बुजुर्ग; मुखिया ने उठाई आवाज
सरकोनी पंचायत में सात माह से पेंशन नहीं मिलने से परेशान बुजुर्गों के साथ मुखिया सुबोध वर्मा।
सात माह से पेंशन बंद, बुजुर्ग बेहाल
भोजन-दवा के लिए तरस रहे वृद्धजन।
कांडी (गढ़वा)। कांडी प्रखंड अंतर्गत सरकोनी पंचायत के डेमा, महुली, सेमौरा, सरकोनी और कर्मा के अमस्था टोला समेत कई गांवों के सैकड़ों बुजुर्ग महिला-पुरुषों ने करीब सात माह से पेंशन नहीं मिलने की शिकायत की है। पेंशन की राशि नहीं मिलने से वृद्धजनों के सामने भोजन, दवा और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। बुजुर्गों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर पेंशन ही उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा है, लेकिन सात माह से राशि नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।
इस गंभीर समस्या के बीच सरकोनी पंचायत के मुखिया सुबोध वर्मा बुजुर्गों की परेशानी को समझते हुए उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों और झारखंड सरकार तक पहुंचाने की पहल कर रहे हैं। पंचायत के जरूरतमंद वृद्धजनों की समस्या के समाधान के लिए उनकी सक्रियता से लाभुकों को बकाया पेंशन मिलने की उम्मीद जगी है।
बुजुर्गों ने बताया कि पेंशन की राशि से वे भोजन की व्यवस्था करने के साथ बीमारी की दवाइयां भी खरीदते हैं। अधिक उम्र होने के कारण कई लोग मेहनत-मजदूरी करने में असमर्थ हैं। ऐसे में सात माह से पेंशन नहीं मिलने के कारण छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। शारदीय नवरात्र और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान भी पेंशन नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
इन बुजुर्गों ने उठाई बकाया पेंशन भुगतान की मांग: कलावती देवी, शनिचरी देवी, बसंती देवी, विगनी देवी, सुगिया देवी, पचिया देवी, हिरामणी देवी, अमरावती देवी, प्रीत राम, बृजदेव साह, डोमन राम, देवमंदन राम और केश्वर राम समेत अन्य लाभुकों ने झारखंड सरकार एवं जिला प्रशासन से सात माह की बकाया पेंशन का जल्द भुगतान कराने की मांग की है।
बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन उनके लिए केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि बुढ़ापे में जीवनयापन का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने संबंधित विभाग से भुगतान में देरी के कारणों की जांच कर पात्र लाभुकों के बैंक खातों में जल्द राशि उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें भोजन, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों के लिए परेशान न होना पड़े तथा वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें।


