जामडीह गांव में एंबुलेंस न पहुँचने से 6–8 मौतों का आरोप,

सड़क नहीं, सिस्टम हत्यारा बना

जामडीह गांव में एंबुलेंस न पहुँचने से 6–8 मौतों का आरोप,

महुआडांड़ प्रखंड के ओरसा पंचायत अंतर्गत जामडीह गांव में सड़क का अभाव अब विकास की असफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से उपजी मौतों का प्रतीक बन चुका है। वर्ष 2025 में सामने आई स्थानीय जानकारियों के अनुसार, एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुँच पाने के कारण 6 से 8 ग्रामीणों की मौत होने का गंभीर आरोप लगाया गया है। मृतकों में गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मरीज शामिल बताए जा रहे हैं। इस खुलासे ने पूरे जिला प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है ग्रामीणों का कहना है कि आज़ादी के दशकों बाद भी जामडीह गांव पक्की सड़क से पूरी तरह वंचित है। बरसात के मौसम में हालात भयावह हो जाते हैं कच्चे रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं और एंबुलेंस गांव से कई किलोमीटर पहले ही मजबूरन रुक जाती है। ऐसे में मरीजों को चारपाई या कंधों पर उठाकर जंगल और पहाड़ी रास्तों से ले जाया जाता है, लेकिन कई मामलों में अस्पताल पहुँचने से पहले ही मरीज दम तोड़ देता है।सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को बार-बार सूचना देने के बावजूद जानबूझकर अनदेखी की गई। सरकारी फाइलों में सड़क, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी योजनाएं “पूर्ण” दर्ज हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जरूरत पड़ने पर एक एंबुलेंस तक गांव में प्रवेश नहीं कर पाती। सवाल सीधा है—जब योजनाएं पूरी थीं, तो फिर ये मौतें किसकी जवाबदेही हैं?गांव की महिलाओं ने रोते हुए बताया कि समय पर अस्पताल नहीं पहुँच पाने के कारण गर्भवती महिलाओं की जान चली गई। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिलाएं सड़क न होने की कीमत अपनी जान देकर चुकाती रहीं। वहीं बुजुर्ग और गंभीर मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ते रहे और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।सबसे शर्मनाक तथ्य यह है कि इतनी मौतों के बावजूद अब तक जिला प्रशासन की ओर से न तो कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है और न ही मौतों का स्पष्ट आंकड़ा सार्वजनिक किया गया है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं पूरे मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं हो रही।

मुखिया ने डीसी को दी जानकारी

इस पूरे मामले पर ओरसा पंचायत की मुखिया अमृता देवी ने बताया कि जामडीह गांव की स्थिति और सड़क निर्माण से जुड़ा मामला उत्कर्ष गुप्ता, उपायुक्त लातेहार, के संज्ञान में लाया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी और की जान न जाए।ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जामडीह गांव तक तत्काल पक्की सड़क का निर्माण और एंबुलेंस की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सरकार की होगी।यह मामला झारखंड में विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था के उन खोखले दावों को बेनकाब करता है, जहां योजनाएं फाइलों में चमकती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में सिस्टम लोगों की जान ले रहा है।