भीषण गर्मी में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं झारखण्ड में सरकार की नाकामी से ;— शत्रुघ्न कुमार शत्रु

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झारखण्ड में सरकार की नाकामी से भीषण गर्मी में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं; शत्रुघ्न कुमार शत्रु

11 जून 2024(मेदिनीनगर)
झारखण्ड क्रांति मंच के संस्थापक सह केन्द्रीय अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार शत्रु ने आज मेदिनीनगर में प्रेस बयान जारी कर कहा है कि झारखण्ड अलग राज्य बनने के 23 वर्षों बाद भी एनडीए और यूपीए सरकारों की ,बिजली उत्पादन क्षेत्र में भीषण नाकामी की वजह से भीषण गर्मी में भी निर्बाध बिजली उपलब्ध नहीं है,वहीं झारखण्ड के कोयले से दिल्ली, हरियाणा व पंजाब जैसे राज्यों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है, निश्चित रूप से इसके लिए अभी तक सत्ता की मलाई खाने में व्यस्त रहे लूटेरे राजनेता व नौकरशाह जवाबदेह हैं।
जारी बयान में उन्होंने कहा है कि इस बार के रिकार्ड तोड़ गर्मी के कारण भारी संख्या में मनुष्यों, चमगादड़ों व पक्षियों की मौत के प्रति लापरवाह केन्द्र व राज्यों की जन विरोधी सरकारें बिजली,पानी जैसे आधारभूत अधिसंरचनाओं के विनिर्माण की दिशा में फिसड्डी साबित हुई हैं।आजादी के कथित अमृत काल में पलामू जैसे जिले में प्राकृतिक जलस्त्रोतों के सुखने पर पीने के पानी के लिए कुएं में डूबकर लगभग 40 बन्दरों की दर्दनाक मौत से भले ही मनुष्यों की सत्ता अनजान बने रहने का नाटक कर रहा हो, लेकिन इसके दूरगामी दुष्प्रभावों से ना केवल सम्पूर्ण जंतु जगत बल्कि पादप जगत के समस्त प्राणियों के समक्ष अस्तित्व का संकट विकराल रूप धारण करने की ओर अग्रसर है?
बयान में झारखण्ड क्रांति मंच के अध्यक्ष ने कहा है कि एक तरफ झारखण्ड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारी व कर्मचारी बिजली विलों की वसूली में सारी मर्यादाओं को तोड़ देते हैं,वहीं 40°C से लेकर 47.8°C तापमान में दिन-रात जुझते उपभोक्ताओं के बीच लगातार बिजली काटने या बाधित करने की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है।
बार-बार झारखण्ड राज्य विद्युत नियामक आयोग के द्वारा बिजली दरों में वृद्धि की घोषणा की जा रही है, लेकिन झारखण्ड के घरेलू व औद्योगिक गतिविधियों के सफल संचालन के लिए पर्याप्त बिजली उत्पादन की सरकारी कार्य योजना सिरे से गायब नजर आती है।
बयान के अंत में उन्होंने कहा है कि झारखण्ड जैसे खनिज संसाधन, वन संसाधन व मानव संसाधन से भरे राज्य के लिए सस्ते व वैकल्पिक उर्जा के स्त्रोतों के संरक्षण व संवर्धन व उत्पादन पर सरकार को ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, लेकिन राज्य की सत्ता में कुंडली मारकर बैठे हुए चाहे इंडिया गठबन्धन के नेता हों अथवा केन्द्र की सत्ता में बैठे हुए एनडीए गठबंधन के,उनकी प्राथमिकताओं में सिर्फ झारखण्ड को लूटकर अपना तिजोरी भरना है।आज भी झारखण्ड की जनता नेता नहीं बल्कि निर्माता की तलाश कर रही है।

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