गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में श्रीराम कथा: ‘सामूहिक प्रार्थना में बहुत बड़ी शक्ति होती है’ — विनोद पाठक
सामूहिक प्रार्थना में बहुत बड़ी शक्ति होती है : विनोद पाठक
गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में श्रीरामकथा का आयोजन
गढ़वा : सामूहिक प्रार्थना में बहुत बड़ी शक्ति होती है. जब भी धरती पर बड़ा संकट आया है, देवताओं ने सामूहिक प्रार्थना का सहारा लिया है. सामूहिक पुकार से भगवान को प्रकट होना पड़ा और देवताओं के संकट का समाधान हुआ. यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने कही. वे सोमवार की शाम गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में श्रीराम कथा सुना रहे थे. रामकथा के दूसरे दिन श्रीराम जन्म के प्रसंग को सुनाते हुये उन्होंने कहा कि त्रेता काल में धरती पर रावण और उनके वंशजों का अत्याचार चरम पर पहुंच चुका था. चारो ओर त्राहि-त्राहि मच गयी थी. चाहे मानव हों, साधु-संत अथवा देवता, सभी रावण के अत्याचार से व्याकुल हो उठे थे. तब ब्रह्माजी की सलाह से सभी देवताओं ने सामूहिक प्रार्थना की थी. परिणामस्वरूप भगवान विष्णु प्रकट हुये और धरती का भार बने असुरों का नाश करने के लिये अयोध्या में श्रीराम के रूप में अवतार लिये. अपने अवतार में प्रभु राम ने एक-एककर सभी असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की. श्री पाठक ने कहा कि इसी तरह से जब धरती पर महिषासुर का आतंक बढ़ गया था, तो सभी देवताओं की प्रार्थना पर मां दुर्गा शक्ति का अवतार हुआ, जिन्होंने महिषासुर का वध कर ऋषि-मुनि, देवताओं और मानव की रक्षा की थी. उन्होंने कहा कि एकल प्रार्थना में भी बल होता है. लेकिन जब संकट बड़ा आ जाता है और एकल प्रार्थना से समाधान नहीं हो पाता है, तो सामूहिक प्रार्थना का सहारा लेना पड़ता है. उन्होंने कहा कि त्रेता युग में श्रीराम के रूप् में विष्णु भगवान को अवतार लेने की पृष्ठभूमि पहले ही बन चुकी थी. उन्हें कश्यप और अदिति के वरदान को फलित करने से लेकर रावण और कुंभकरण का उद्धार भी करना था. प्रभु श्रीराम ने धर्म की रक्षा कर राम राज्य की स्थापना की. रामकथा के दौरान शिवपूजन मेहता ने अपने प्रासंगिक भजनों से वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बनाने का काम किया. उनके साथ नाल पर नंदू ठाकुर, बेंजो पर रंजीत विश्वकर्मा और झाल पर अशोक विश्वकर्मा व अभिषेक ठाकुर ने संगत किया. इस अवसर पर समाजसेवी सरयू चंद्रवंशी, मिथिलेश कुशवाहा, प्रभुदयाल प्रजापति, अनिल विश्वकर्मा, संत कुमार, अवधेश यादव, संजय यादव, ओम समिति के अध्यक्ष चंद्रमणि कुमार, गौतम विश्वकर्मा, अजीत शर्मा सहित ओम समिति के सभी सदस्य और काफी संख्या में महिला-पुरूष श्रोता उपस्थित थे.

