झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: घरजमाई बनने की पत्नी की इच्छा को मानसिक क्रूरता नहीं माना
रांची: झारखंड हाईकोर्ट में पति-पत्नी के बीच घरजमाई बनने को लेकर चल रहे विवाद पर अदालत ने अहम टिप्पणी की है। पत्नी की इच्छा थी कि उसका पति अपने वृद्ध माता-पिता को छोड़कर पटना में उसके मायके में घरजमाई बनकर रहे। पति ने इसे मानसिक क्रूरता बताते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की थी।
मामला फैमिली कोर्ट से होते हुए झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सिर्फ पत्नी का पति को घरजमाई बनने के लिए कहना अपने आप में वैवाहिक क्रूरता नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मायके जाना पत्नी का अधिकार है, जबकि घरजमाई बनना या नहीं बनना पति की अपनी पसंद है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पति की तलाक संबंधी अपील को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। दोनों की शादी वर्ष 2008 में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद घरजमाई बनने की इच्छा को लेकर पति की ओर से लगाए गए मानसिक क्रूरता के आरोप को तलाक का आधार नहीं माना गया।

