5000 वर्षों की गुलामी से सताए लोगों को मिलनेवाला आरक्षण कोई भीख नहीं है: झारखण्ड क्रांति मंच
5000 वर्षों की गुलामी से सताए लोगों को मिलनेवाला आरक्षण कोई भीख नहीं है: झारखण्ड क्रांति मंच
झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार शत्रु ने मेदिनीनगर में प्रेस बयान जारी कर कहा है कि पिछले 5000 वर्षों से समाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, मानसिक व शारीरिक रूप से सताए गए अनुसूचित जाति/जन जाति व पिछड़े वर्ग के लोगों को देश के मुख्य धारा में लाने का समानुपातिक प्रतिनिधित्व का संवैधानिक उपचार आरक्षण का प्रावधान है।इसे गरीबी हटाओ कार्यक्रम समझने के बदले इसके ऐतिहासिक कारणों को समझकर बाबा साहेब डॉ बी०आर०अम्बेडकर जी के नेतृत्व में संविधान सभा ने पारित कर इसे लागू करवाया है,जिसको भी इस आरक्षण से दिक्कत है, उन्हें सबसे पहले जाति,वर्ण व भीषण समाजिक व धार्मिक असमानता को मिटाने के लिए सामने आना चाहिए।
बयान में उन्होंने कहा है कि सभी दलों के एससी एसटी संवर्गों के निर्वाचित सांसदों को मिलकर आरक्षण को संविधान के 9 वीं अनुसूची में शामिल कराना चाहिए था, लेकिन अफसोस की बात है कि जातिवादी,वर्णवादी, पर लोकतांत्रिक मनुवादियों के भड़वे, दलाल व गुलाम बनकर मजाक बन चुके राजनीतिक आरक्षण के जरिए सांसद, विधायक व मंत्री बनने वाले कलंक बन चुके अपाहिज मानसिकता के लोग आरक्षण के पक्ष में बोलने में पक्षाघात के शिकार हो जाते हैं।
बयान में जेकेएम अध्यक्ष ने कहा है कि जिस तरह देश की कार्यपालिका व विधायिका में सदियों से प्रताड़ित कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, ठीक उसी तरह सर्वोच्च न्यायपालिका के अलावा विभिन्न राज्यों के उच्च सदन विधान परिषद व देश के उच्च सदन राज्यसभा में भी आरक्षण लागू होना चाहिए।
बयान के अंत में उन्होंने कहा है कि अफसोस की बात है कि इस देश में आरक्षण के कारण स्वीपर से लेकर उपर तक अधिकारी व कर्मचारी बनने वाले एससी, एसटी व ओबीसी के लोग “पे बैंक टू सोसायटी फोर स्ट्रगल” को भूल कर रंगीन टीवी से लेकर अपने बच्चे व बीबी तक सिमटते जा रहे हैं।जब हम जैसे लोग उनका फर्ज याद दिलाते हुए उन्हें आगाह करते हैं तो इसका जवाब एससी एसटी कर्मचारी संघ के लोग अभद्र भाषा का प्रयोग कर देते हैं?

