राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय बरवाडीह में नामांकन शुल्क को लेकर उठे सवाल,बिना रसीद राशि लेने का आरोप,
राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय बरवाडीह में नामांकन शुल्क को लेकर उठे सवाल,बिना रसीद राशि लेने का आरोप,
संवाददाता:सुरेंद्र कुमार
बरवाडीह (लातेहार) : राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय, बरवाडीह में इन दिनों कक्षा 11 एवं 12 में नामांकन प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच नामांकन शुल्क को लेकर स्कूल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों एवं विद्यार्थियों का आरोप है कि नामांकन के दौरान निर्धारित शुल्क की कोई सार्वजनिक सूची विद्यालय परिसर में नहीं लगाई गई है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों से राशि लेने के बाद भी उन्हें शुल्क की विधिवत रसीद नहीं दी जा रही है। विद्यालय में नामांकन की पहली प्रक्रिया के तहत 50 रुपये का नामांकन फॉर्म दिया जा रहा है, लेकिन इसके बाद किस वर्ग के विद्यार्थियों से कितना शुल्क लिया जाना है, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी विद्यालय में प्रदर्शित नहीं की गई है। इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। नामांकन कराने आए कई विद्यार्थियों से बातचीत में अलग-अलग जानकारी सामने आई। अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के एक छात्र ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण उससे 1020 रुपये लिए गए। वहीं दूसरे एसटी छात्र ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र जमा करने के बावजूद उससे भी 1020 रुपये ही लिए गए। दोनों छात्रों ने बताया कि उन्हें केवल नामांकन फॉर्म की पावती दी गई, लेकिन शुल्क की कोई रसीद नहीं मिली। इसी तरह अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के एक छात्र के अभिभावक ने बताया कि उनसे 950 रुपये लिए गए, लेकिन रसीद नहीं दी गई। वहीं एक अन्य एसटी छात्र ने बताया कि उससे 850 रुपये लिए गए। जबकि अन्य विद्यार्थियों के अनुसार ओबीसी एवं सामान्य वर्ग के छात्रों से 1050 से 1100 रुपये तक की राशि ली जा रही है। जब विद्यालय प्रबंधन से यह पूछा गया कि किस श्रेणी के विद्यार्थियों से कितना शुल्क लिया जाना निर्धारित है, तो स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका से शुल्क निर्धारण की सूची दिखाने का अनुरोध किया गया, लेकिन कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई। इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी को पूरे मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नामांकन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में यदि शुल्क निर्धारण को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जाती, विद्यार्थियों से अलग-अलग राशि ली जाती है और शुल्क की रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों की भी पहली पाठशाला होती है। ऐसे में यदि शुरुआती स्तर पर ही वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है,

