गिरिडीह में गायत्री जयंती महापर्व, पंचकुंडीय महायज्ञ के साथ हुआ समापन
गिरिडीह। अखिल विश्व गायत्री परिवार, गिरिडीह द्वारा आयोजित दो दिवसीय गायत्री जयंती एवं गंगा दशहरा महापर्व का आज स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ में पांच-कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ। पहले दिवस अखंड गायत्री महामंत्र जप व शाम में दीप महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आहुतियाँ समर्पित कर सबके मंगल एवं उज्जवल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में बोकारो जिला उप समन्वयक श्याम नंदन सिंह ने दीप महायज्ञ के दौरान कहा कि सद्बुद्धि व विवेक की देवी मां गायत्री की उपासना से जीवन में पड़े विपत्तियाँ व संकट दूर होते हैं। उन्होंने कहा कि धन होने पर भी यदि जीवन में सुख-शांति न हो तो जीवन व्यर्थ है; गायत्री महामंत्र की उपासना से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। श्याम नंदन ने बताया कि अज्ञान के कारण व्यक्ति संकटों से घिरा रहता है, पर नियमित महामंत्र जप व लेखन से ज्ञान चक्षु खुलते हैं और अज्ञान दूर होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गायत्री परिवार से जुड़े लोग वर्तमान में भारत व विश्व के लगभग 80 देशों में नियमित गायत्री महामंत्र की उपासना कर रहे हैं। गिरिडीह शक्तिपीठ के साथ-साथ जिले के सभी प्रखंडों में स्थित प्रज्ञा पीठ व चेतना केन्द्रों में भी दो दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पूरे जिले में श्रद्धालुओं ने हाथों से आहुतियाँ दीं एवं महायज्ञ में भाग लेकर आयोजन को पावन बनाया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मुख्य प्रबंधक कामेश्वर सिंह, भागीरथ प्रसाद सिंह, योगेश्वर महतो, दर्शन पंडित, बुधन प्रसाद वर्मा, दयानंद प्रसाद, बासुकीनाथ राय, संदीप कुमार, पोखन महतो, राजेश कुमार राम, नरेश यादव तथा महिला मंडल की बहनों का विशेष योगदान रहा।

