जड़ों की ओर लौटो” – भारत विकास परिषद् ने विद्यार्थियों को दिया संस्कार का संदेश

जड़ें भूल रहा भारत, परिषद् ने दी संस्कार की सौगात
सरस्वती शिशु मंदिर बरगंडा में भारत विकास परिषद् का उद्घोष – संस्कारवान व्यक्ति ही बनाएगा सुदृढ़ राष्ट्र

*सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा, गिरिडीह। विद्यालय परिसर में आयोजित वंदना सभा राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बन गई। इस अवसर पर भारत विकास परिषद् के प्रतिनिधि मंडल ने “वापस अपनी जड़ों की ओर” का आह्वान कर विद्यार्थियों को झकझोर दिया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य आनंद कमल ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। तत्पश्चात भारत विकास परिषद् के पदाधिकारियों का अभिनंदन किया।

इस अवसर पर भारत विकास परिषद् की किरण बरनवाल, शकुंतला वर्मा, देवराज तथा परिषद् के प्रांतीय अधिकारी देवेंद्र विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता किरण बरनवाल ने कहा, 10 जुलाई 1963 में स्थापित भारत विकास परिषद् आज भी स्वामी विवेकानंद के विचारों को घर-घर पहुंचाने के संकल्प पर अडिग है। हम ‘संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा, समर्पण’ इन पंच प्राणों के माध्यम से एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं जो शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सक्षम और आचार-विचार से संस्कारित हो।”

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “विडंबना है कि हम भारतीय अपनी संस्कृति को ‘पुराना’ कहकर नकार रहे हैं, जबकि अमेरिका से लेकर जापान तक योग, ध्यान और संस्कृति को अपना रहा है। हमारी पहचान हमसे छिन रही है। यदि आज विद्यालयों ने कमान नहीं संभाली तो कल बहुत देर हो जाएगी। सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संस्थान इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रहरी हैं।

किरण के ओजस्वी विचारों ने भैया – बहनों में नवचेतना का संचार किया।