भगवान बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर एबीवीपी ने दी श्रद्धांजलि, याद किया उनका संघर्ष

गिरिडीह। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की शहादत दिवस पर आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), गिरिडीह नगर इकाई ने बिरसा चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
प्रांतीय स्तर से अभाविप प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष मुख्यतः आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा तथा विदेशी तानाशाही से मुक्ति के लिए था। मंटू मुर्मू ने बताया कि ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए वन कानूनों ने आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार छीने थे, जिसके खिलाफ बिरसा ने सशक्त आंदोलन छेड़ा ताकि जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासियों का स्वाभाविक अधिकार बना रहे।
मंटू मुर्मू ने यह भी कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज को जमींदारों, साहूकारों और बाहरी शोषकों के आर्थिक उत्पीड़न से बचाने हेतु आवाज उठाई। उन्होंने ‘मुंडा राज’ की स्थापना का संकल्प लिया था—एक ऐसा समाज जहाँ आदिवासियों का स्वशासन हो और वे ब्रिटिश शासकीय दमन व अन्य दमनकारी नीतियों से मुक्त हों। इसके अलावा मंटू ने बिरसा द्वारा किए गए धार्मिक और सामाजिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को अंधविश्वास, नशाखोरी और अनावश्यक धर्मांतरण से बचाने का प्रयास किया।
प्रांत SFS के सह संयोजक अनीश राय ने मौके पर कहा कि बिरसा मुंडा का विद्रोह—उलगुलान—ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी था और आज भी आदिवासी संस्कृति और पहचान की रक्षा का प्रतीक है। कार्यक्रम में नगर सह मंत्री सदानंद राय, कॉलेज मंत्री क्रिस पासवान, कॉलेज सह मंत्री करण यदुवंशी, साकेत सिंह, प्रेम सिंह और स्थानीय वन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
मौके पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने मिलकर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की और बिरसा मुंडा के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।