इटखोरी प्रखंड की सहायिका लीला सिन्हा प्रकरण पर चतरा उपायुक्त रवि आनंद का बड़ा बयान, जांच रिपोर्ट मिलते ही होगी उचित कार्रवाई

आंगनबाड़ी सहायिका की ड्यूटी बहाली की मांग पर प्रशासन गंभीर, सीडीपीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों की भी होगी जांच

प्रमुख समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक जांच पर टिकीं निगाहें

चतरा/इटखोरी : इटखोरी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र रजवार की सहायिका लीला सिन्हा की ड्यूटी बहाली को लेकर चल रहा विवाद अब जिला प्रशासन के संज्ञान में है। मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद बुधवार की शाम जब जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त रवि आनंद से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला उनके संज्ञान में है तथा इसकी जांच के लिए आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।
उपायुक्त रवि आनंद ने बताया कि इटखोरी की आंगनबाड़ी सहायिका लीला सिन्हा जनता दरबार में भी आवेदन देकर न्याय की मांग कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही तथ्यों के आधार पर यथासंभव उचित कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त के इस बयान के बाद लंबे समय से न्याय की आस लगाए बैठी सहायिका लीला सिन्हा को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
गौरतलब है कि लीला सिन्हा पिछले कई महीनों से अपनी ड्यूटी बहाली की मांग को लेकर कई कार्यालयों का चक्कर लगा रही हैं। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट लिखित आदेश और निष्पक्ष जांच के उन्हें कार्य से दूर रखा गया है। उनका कहना है कि यदि उनकी उम्र अथवा सेवा अवधि को लेकर कोई विवाद है तो विभाग उनके सभी दस्तावेजों की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
वहीं इस मामले के बीच कुछ आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा इटखोरी सीडीपीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मियों ने विकास मद, सामग्री खरीद, वार्षिक वृद्धि राशि तथा अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराने की आवश्यकता जताई है। हालांकि इन आरोपों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य है तो उनकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपायुक्त द्वारा दिए गए जांच निर्देशों की रिपोर्ट कब तक आती है, लीला सिन्हा की ड्यूटी बहाली के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है तथा आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा उठाए गए वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर प्रशासन किस स्तर पर कार्रवाई करता है।