पांकी के लावाबार झाबर टोले में मूलभूत सुविधाओं से वंचित आदिम जनजाति के परिवार, कई ग्रामीण बीमार

​ पांकी प्रखंड के संगलदीपा पंचायत के लावाबार झाबर टोला के लोग आज भी मध्ययुगीन दौर में जीने को मजबूर है। इस टोले में रहने वाले आधा दर्जन से अधिक आदिम जनजाति के परिवार बुनियादी सुविधाओं—जैसे स्वच्छ पेयजल, सड़क, और स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह वंचित हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि समुचित इलाज और दूषित पानी पीने के कारण वर्तमान में कई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार हैं, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।
​स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, टोले में स्वच्छ पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण आज भी दूषित जल स्रोतों से पानी पीने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में जलस्तर नीचे चले जाने से समस्या और विकराल हो गई है। दूषित पानी के सेवन से टोले के कई लोग बीमार पड़ चुके हैं। बीमारों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जो सर्दी, खांसी, बुखार और पेट जनित बीमारियों से पीड़ित हैं।
​झाबर तोले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां तक पहुंचने के लिए कोई सुगम सड़क नहीं है। स्वास्थ्य उप-केंद्रों की दूरी और यातायात के साधनों के अभाव के कारण बीमार लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीण आज भी झाड़-फूंक और पारंपरिक तौर-तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे उनकी जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
​केंद्र और राज्य सरकारें आदिम जनजातियों को उनके संरक्षण के लिए विशेष बजट आवंटित करती है लेकिन लावाबार झाबर टोले की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।
​स्थानीय पीड़ितों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अविलंब इस टोले में मेडिकल कैंप लगाने, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उन तक पहुंचाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही उनकी सुध नहीं ली गई, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस संबंध में प्रखंड प्रमुख पंचम प्रसाद ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें मिली है स्थिति बेहद चिंताजनक है, शीघ्र ही अधिकारियों से संपर्क कर पेयजल समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ उन्हें दिलाया जाएगा।

प्रभारी चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर महेंद्र प्रसाद ने बताया कि मेडिकल टीम भेज कर सभी बीमार लोगों का इलाज किया जाएगा।