सदर अस्पताल को “रिम्स-2” बनाने की मांग पर आमरण अनशन, उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने दिखाई संवेदनशीलता
गुमला: सदर अस्पताल में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति एवं बेहतर इलाज व्यवस्था की मांग को लेकर सोमवार से झारखंड प्रदेश प्रतिज्ञा महिला एसोसिएशन ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। संगठन की जिला अध्यक्ष देवकी देवी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सदर अस्पताल परिसर के बाहर धरना देते हुए सिविल सर्जन के नाम 15 सूत्री मांग पत्र उपाधीक्षक को सौंपा।
देवकी देवी ने कहा कि गुमला आदिवासी बहुल जिला है, जहां दूर-दराज ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन अस्पताल में समुचित सुविधा और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अधिकांश मरीजों को रिम्स रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब मरीजों को आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से मृत्यु दर भी बढ़ रही है।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि गुमला सदर अस्पताल को “रिम्स-2” के रूप में विकसित किया जाए, ताकि जिलेवासियों को बेहतर और समुचित इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सके। साथ ही अस्पताल में सभी आवश्यक डॉक्टरों की नियुक्ति, जांच सुविधा, दवाइयों की उपलब्धता एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग रखी गई।
वहीं अनशन के दौरान सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए प्रदर्शनकारियों को पानी उपलब्ध कराया। इस पहल की लोगों ने सराहना की। डॉ. अनुपम किशोर ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों की सुविधा का ध्यान रखा, जिससे अस्पताल प्रशासन की सकारात्मक और संवेदनशील कार्यशैली देखने को मिली। उनकी इस पहल को लेकर उपस्थित लोगों ने कहा कि प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ-साथ मानवीय व्यवहार भी बेहद जरूरी है, जिसे उपाधीक्षक ने बखूबी निभाया।

