एक सांस्कृतिक उद्यान वर्तमान समय की आवश्यकता है : नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’
एक सांस्कृतिक उद्यान वर्तमान समय की आवश्यकता है : नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’
गढ़वा नगर परिषद् क्षेत्र में स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाएँ हमारे इतिहास, संस्कृति और आदर्शों की जीवंत प्रतीक हैं। ये प्रतिमाएँ केवल पत्थर या धातु की संरचनाएँ नहीं, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की स्मृति हैं जिन्होंने समाज और राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। ऐसे में इनका सम्मान और संरक्षण हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।
दुर्भाग्यवश, वर्तमान समय में नगर के विभिन्न चौक-चौराहों तथा सड़कों के किनारे स्थापित इन प्रतिमाओं की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। धूल, धुआँ, वाहन प्रदूषण तथा पशु-पक्षियों द्वारा फैलाए गए कचरे के कारण इनका स्वरूप मलिन हो रहा है। यह न केवल हमारे महापुरुषों के प्रति असम्मान का प्रतीक है, बल्कि नगर की स्वच्छता और सभ्यता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
इस समस्या का एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान यह हो सकता है कि नगर परिषद् इन सभी प्रतिमाओं को किसी एक सुव्यवस्थित उद्यान (पार्क) में स्थानांतरित या पुनर्स्थापित कर दे। इससे एक ओर जहाँ इनकी नियमित साफ-सफाई और देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी, वहीं दूसरी ओर इनका संरक्षण भी बेहतर ढंग से किया जा सकेगा। उद्यान में नियुक्त माली या संबंधित कर्मचारी इन प्रतिमाओं की नियमित देखरेख कर सकेंगे, जिससे वे सदैव स्वच्छ और आकर्षक बनी रहेंगी।
इसके अतिरिक्त, सभी महापुरुषों की प्रतिमाएँ एक ही स्थान पर स्थापित होने से नागरिकों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को एक साथ अनेक महान विभूतियों के दर्शन और उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यह स्थान एक प्रकार से प्रेरणा केंद्र या “सांस्कृतिक उद्यान” के रूप में विकसित हो सकता है, जहाँ लोग केवल घूमने ही नहीं, बल्कि सीखने और आत्ममंथन के लिए भी आएँ।
अतः सक्षम प्राधिकार से विनम्र निवेदन है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएँ। महापुरुषों की प्रतिमाओं का सम्मान, दरअसल हमारे अपने संस्कारों और मूल्यों का सम्मान है। यदि हम इन्हें सुरक्षित और स्वच्छ रख सकें, तो यह हमारी सांस्कृतिक चेतना और कृतज्ञता का सच्चा प्रमाण होगा।

