वर्षों से अधूरे पड़े सरना स्थल की घेराबंदी कर चाहरदिवारी निर्माण का स्वयं ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

वर्षों से अधूरे पड़े सरना स्थल की घेराबंदी कर चाहरदिवारी निर्माण का स्वयं ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा

सिसई (गुमला)। विगत् आठ वर्षों से अधुरे पड़े सरना स्थल की घेराबंदी का ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा।

प्रखंड मुख्यालय के बगल में स्थित कुदरा गांव के ग्रामीणों द्वारा गांव के धार्मिक सरना स्थल के अधुरे पड़े चाहर दिवारी को बनाने को लेकर गांव के पहान कीनू उरांव द्वारा विधिवत पूजा अर्चना किया गया तत्पश्चात ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर रविवार को चाहर दिवारी निर्माण की शुरुआत की।
ग्रामीणों के अनुसार विगत् आठ साल पहले जिला कल्याण विभाग द्वारा गांव के सरना स्थल की घेराबंदी शुरू हुई थी, लेकिन लाभुक समिति के सचिव फिर अध्यक्ष के निधन हो जाने के बाद चाहर दीवारी निर्माण कार्य अधुरा रह गया था।

ग्रामीणों के अनुसार अध्यक्ष-सचिव के देहांत के बाद नये सिरे से ग्राम सभा के माध्यम से समिति चयन कर सरना घेराबंदी पुरा कराने का प्रयास किया गया था,किन्तु विभागीय स्तर पर साकारात्मक पहल नहीं होने के कारण निर्माण कार्य अधुरा रह गया। अधुरे पड़े धार्मिक स्थल की चाहरदीवारी से धार्मिक अनुष्ठान व पुजा पाठ में काफी कठिनाई व परेशानियाँ होने लगी जिसे देखते हुए ग्रामीणों द्वारा स्वयं से सरना स्थल की पक्की घेराबंदी निर्माण का निर्णय लिया गया और गांव के पहान कीनू पहान,पुजार मगन उरांव, महतो जीतवाहन उरांव,ग्राम प्रधान जयराम उरांव,मनीपाल उरांव, सनी उरांव,बुचनू उरांव, जयंती देवी, एतवारी उरांव, अनिता उराईन, बोण्डो देवी,दुलिया देवी, छोटी उरांव, उषा देवी, सुखन उरांव, मंगल उरांव, बुदू उरांव, रमेश उरांव, सुरज उरांव,सुरज उरांव, रामदयाल उरांव सहित अन्य गणमान्य व गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष के नेतृत्व और सामुहिक सहयोग से सरना धर्म स्थल के घेराबंदी करने का निर्माण शुरू किया गया। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुर्व से पारित सरकारी योजना के तहत सरना घेराबंदी में नये सिरे से लाभुक समिति का चयन कर योजना के बाकि बचे राशि का भुगतान होने से हमारे गांव के आदिवासी संस्कृति -सभ्यता और स्मिता का प्रतीक सरना स्थल का सुनियोजित व वृहद रूप से घेराबंदी किया जा सकता है।