डंडा प्रखंड की मान्यता यथावत रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं पूर्व मंत्री

डंडा प्रखंड की मान्यता यथावत रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं पूर्व मंत्री

मिथिलेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

फोटो : मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते मिथिलेश ठाकुर

गढ़वा। जिले के डंडा प्रखंड सह अंचल की मान्यता समाप्त किए जाने की संभावनाओं को लेकर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर काफी चिंतित हैं। डंडा प्रखंड सह अंचल की मान्यता यथावत रखने के लिए वे लगातार प्रयासरत हैं। शनिवार को पूर्व मंत्री श्री ठाकुर ने डंडा प्रखंड एवं नगर पंचायत मझिआंव को विलोपित करने के लिए गढ़वा डीसी द्वारा सरकार को लिखे गए पत्र को निरस्त करते हुए मान्यता यथावत रखने सहित पलामू प्रमंडल की विभिन्न समस्याओं के निदान के लिए मांग पत्र सौंपा है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में श्री ठाकुर ने उल्लेख किया है कि गढ़वा जिला आज़ादी के बाद से ही एक स्वतंत्र जिले के रूप में अस्तित्व की लड़ाई लड़ा है। तब जाकर सन् 1991 में इसे पलामू से अलग कर जिला बनाया गया था। झारखंड राज्य के गठन के बाद प्रशासनिक सुविधा, भौगोलिक स्थिति और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जिले में प्रखंडों का पुनर्गठन किया गया। इसी क्रम में वर्ष 2008 में डंडा प्रखंड का गठन किया गया। ताकि क्षेत्र की जनता को प्रशासनिक सेवाओं का लाभ उनके नजदीक मिल सके। डंडा प्रखंड का उद्घाटन झारखंड आंदोलन के नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुआ था। जिससे इसकी ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्ता भी जुड़ी हुई है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि डंडा प्रखंड मुख्यालय गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस क्षेत्र में आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, किसान, मजदूर एवं दलित समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। प्रखंड और अंचल कार्यालय इन लोगों के लिए भूमि संबंधी कार्य, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, पेंशन, जन्म,मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य सरकारी सेवाओं की प्राप्ति का प्रमुख केंद्र हैं। यदि डंडा प्रखंड की मान्यता समाप्त की जाती है, तो आम नागरिकों को इन आवश्यक कार्यों के लिए दूर-दराज के कार्यालयों पर निर्भर रहना पड़ेगा। जिससे उन्हें समय, धन और श्रम की भारी क्षति होगी। प्रशासनिक दृष्टि से डंडा प्रखंड की मान्यता समाप्त करना व्यावहारिक नहीं है। यह निर्णय जनहित के विरुद्ध होगा।
इसके बावजूद गढ़वा जिला प्रशासन द्वारा डंडा प्रखंड सह अंचल एवं मंझिआंव नगर पंचायत की मान्यता समाप्त करने संबंधी पत्र मुख्य सचिव, झारखंड सरकार को भेजा जाना दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी कदम है। पूर्व मंत्री श्री ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मिलकर आग्रह किया है कि गढ़वा जिला अंतर्गत डंडा प्रखंड सह अंचल एवं मंझिआंव नगर पंचायत की मान्यता को पूर्ववत बनाए रखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। ताकि आम जनता को किसी प्रकार की प्रशासनिक असुविधा का सामना न करना पड़े।
ज्ञात हो कि डंडा प्रखंड के पंचायत प्रतिनिधियों एवं आम जनों ने इस संबंध में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री श्री ठाकुर से मिलकर समस्या से अवगत कराया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मंत्री श्री ठाकुर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूर्व में भी मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर डंडा प्रखंड सह अंचल एवं नगर पंचायत मंझिआंव की मान्यता यथावत रखने की मांग की थी।