डीएवी विद्यालय में प्रदर्शनी सह बाल महोत्सव का हुआ आयोजन

स्कूली शिक्षा का महत्त्व बहुत होता है, विषम परिस्थिति में सकारात्मक बने :रतन कुमार

लोहरदगा: एमबी डीएवी विद्यालय में प्राचार्य जीपी झा के नेतृत्व व निर्देशन में विज्ञान, कला एवं शिल्प प्रदर्शनी सह बाल महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सेवानिवृत्त आईएएस, कर्मचारी चयन आयोग, झारखंड के पूर्व अध्यक्ष रतन कुमार मुख्य अतिथि तथा एसडीपीओ श्रद्धा केरकेट्टा, एआरओ, डीएवी विद्यालय जोन ‘अ’ ओ पी मिश्रा ,एलएमसी सदस्य चंद्रशेखर भगत,गुमला डीएवी प्रिंसिपल आर के साहू, लातेहार प्रिंसिपल, एस के सहाय, गढ़वा प्रिंसिपल ए के मंडल, जवाहर नवोदय विद्यालय जोगना प्रिंसिपल ए के झा अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ फीता काटकर किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने बद्रीनाथ मंदिर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग,अंडमान निकोबार का सेल्यूलर जेल, सोशल मीडिया ऐप तथा अन्य विविध माॅडल बनाया गया जिन्हें मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों तथा अभिभावकों द्वारा खूब सराहा गया। तत्पश्चात रंगारंग कार्यक्रम की शुरुआत हुई। शिक्षिका ज्योति पांडे ने मंच संचालन किया। माननीय प्राचार्य जी पी झा द्वारा मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन किया गया। संगीत शिक्षक श्रवण कुमार पाठक के सहयोग से छात्राओं द्वारा मनोरम संगीत प्रस्तुत किया गया। विद्यालय के नन्हें विद्यार्थियों से लेकर बड़े विद्यार्थियों तक मनमोहक व आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया। रंगारंग कार्यक्रम में शिक्षिका आरती कुमारी, रीना रितिका, खुशबू कुमारी, पूनम सिंह, दिव्या कुमारी, रजनी प्रसाद, संगीता मित्तल, सोमिता दास, श्वेता कुमारी, रिनी कुमारी तथा प्रिया कुमारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जूनियर डीएवी में आयोजित विविध प्रतियोगिताओं में विजित विद्यार्थियों को ट्रॉफी प्रदान किया गया। ओ पी मिश्रा (ए आर ओ, डीएवी जोन ‘अ’) ने अपने भाषण के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके अतुलनीय सृजनात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साह वर्धन किया। मौके पर मुख्य अतिथि रतन कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रदर्शनी में उनके प्रयास, उनकी रचनात्मकता तथा उनके पीछे शिक्षकों के सहयोग को काफी सराहा। स्कूली शिक्षा के महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर तथा मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम के स्कूली जीवन से संबंधित कुछ प्रेरक घटनाओं को विद्यार्थियों से साझा करते हुए विषम परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहने जाति प्रथा जैसी कुरीतियों से परे अपनी विचारधारा को श्रेष्ठ रखने की प्रेरणा दी। सभी शिक्षक शिक्षिकाओं के सतत् प्रयास से कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।