झारखण्ड सरकार कि दोहरी नीति से लाखों छात्र शिक्षक बनने से वंचित है-विश्व दिव्यामान दुबे(शिक्षक)

झारखण्ड में रोजगार एक बड़ी समस्या है जिसका निराकरण 25 वर्ष के झारखण्ड में अब तक नहीं हों पायी है. इस 25 वर्षो में कई सरकारें आयी और कई गयी लेकिन झारखण्ड में अब तक न तों स्थानीय नीति और न ही नियोजन नीति बन पायी है, ऐसे में छात्र दर बदर भटकने पर मजबूर है.आज तक जितने भी राज्य स्तरीय पदों पर बहाली प्रक्रिया हुई है कोर्ट का चक्कर लगाए बिना पूरी नहीं हों पायी है.गौरतलब यह कि कई छात्रों के इस नीति के पेंच उम्र भी खत्म हों चुकी है और लाखों कि उम्र खत्म होने कि कगार पर है.इसी कड़ी में राज्य में शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी 26001 पदों के लिए आवेदन लिए गए थे जिसमें झारखण्ड टेट एवं सी टेट दोनों को शामिल किया गया था और सभी छात्रों ने परीक्षा भी दिया था कई छात्रों का परीक्षा सेंटर उनके जिले से 200 किमी पर जाकर दूसरे जिले में दिए थे.लेकिन माननीय सर्वोच्च न्यायलय कि एक फैसला ने लाखों सी टेट पास छात्रों का सपना चकनाचूर हों गया. ऐसे में उन छात्रों कि क्या गलती थी जो शिक्षक बनने कि सपना पल एक बंद कमरे में देख रहें थे.झारखण्ड सहायक आचार्य के स्नातक स्तरीय 15001पदों में से मात्र 5775 छात्रों को क्वालीफाई किया गया,इनमें 9226 पद खाली रह गए
, ऐसे में सीटेट अभ्यर्थी इंतजार का बाँट जोह रहें है कि कब सरकार दुबारा शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा और कब जेटेट लेकर रिक्तिया भरेगा.अगर राज्य सरकार झारखण्ड टेट लेने में असफल रहीं तों इसमें उन छात्रों का क्या कसूर था जिन्हे बाहर कर दिया गया.आपको बताते चले कि 25 वर्ष के झारखण्ड में अब तक तीन बार 2011,2013 एवं 2016 में ही झारखण्ड टेट हों पाया है लेकिन नियम के अनुसार अब तक 25 बार झारखण्ड टेट होना चाहिए था.
झारखण्ड सरकार क्या स्थानीय नीति एवं नियोजन नीति में फेल हों रहीं है? क्या शिक्षक बनने के सपना देख रहें छात्रों का सपना ही रह जायेगा? कई प्रश्न चिन्ह खड़े होते है की सरकार द्वारा की दावा क्या दावा ही रहेगी या हकीकत में बदलेगी अब ये देखने वाली बात होगी?लगभग 6 लाख डीएलएड और बीएड अभ्यर्थी का सपना पूरा होगा की नहीं ये सरकार ही तय करेगी इनकी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए शिक्षक भर्ती आवेदन एवं जेटेट कब तक होगी.कोन आगे आता है, या कहावत राज्य की मुखिया चरितार्थ करते है या केवल कहावत बनकर ही रह जाएगा- मुखिया मुखु सो चाहिए खान-पान कहुँ एक । पालई-पोषई सकल अंग तुलसी सहित विवेक ।