सावन महोत्सव में पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

महिला समिति व बालिका समिति के आयोजन में झूमे बच्चे-बड़े, नृत्य, गीत और खेलों ने बांधा समा

राखी सेठ बनीं सावन क्वीन, निधि कपसीमे रहीं उपविजेता

आदिवासी एक्सप्रेस

झुमरी तिलैया। सावन की हरियाली और भक्ति से सराबोर माहुरी महिला समिति व बालिका समिति के संयुक्त तत्वावधान में गौरी शंकर मोहल्ला स्थित श्री माहुरी भवन मे आयोजित सावन महोत्सव में पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं और बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का अद्भुत प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम न सिर्फ मनोरंजन से भरपूर रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी स्नेह का भी प्रतीक बना।कार्यक्रम की शुरुआत मां मथुराशिनी की वंदना से हुई, जिसमें सभी महिलाओं ने एक-दूसरे को सावन की शुभकामनाएं देकर उत्सव का शुभारंभ किया। पारंपरिक हरी-भरी सजावट, लोक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उल्लास और उमंग से भर दिया।
कार्यक्रम में सावन का महीना आया है भोलेनाथ पर निधि कपसीमे और बरसो रे मेघा पर नव्या कपसीमे ने शानदार प्रस्तुति दी। जसिका सेठ ने बद्री की दुल्हनिया, कनक कुमारी ने मारो ढोलना और आराध्या तरवे ने नाचू आज छम-छम पर नृत्य कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।महिलाओं में अंकित लोहानी ने चूड़ी भी जिद पर आई और नेहा भदानी ने मेरे भारत की बेटी पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।

सावन क्वीन प्रतियोगिता बनी मुख्य आकर्षण

खास आकर्षण रही सावन क्वीन प्रतियोगिता, जिसमें प्रतिभागियों ने पारंपरिक लिबास, आत्मविश्वास और सौंदर्य के साथ अपनी संस्कृति का अद्भुत परिचय दिया। प्रतियोगिता में राखी सेठ को सावन क्वीन घोषित किया गया जबकि निधि कपसीमे रनर अप रहीं।खेल प्रतियोगिताओं में नूतन आर्य, सृष्टि देवी और शिवांगी सेठ विजेता बनीं। मंच पर हर कोई उल्लास और उमंग से झूमता नजर आया।

स्वादिष्ट व्यंजनों से सजा स्टॉल

कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए, जिनका सभी ने भरपूर आनंद लिया। स्वाद, संस्कृति और सौहार्द का यह संगम हर किसी के मन को भा गया।कार्यक्रम में महिला समिति की केंद्रीय उपाध्यक्ष सुनीता सेठ ने कहा, यह आयोजन हमारी संस्कृति, नारी शक्ति और एकजुटता का प्रतीक है। महिलाओं का यह उत्साह प्रेरणादायी है।अध्यक्ष रेनू बड़गवे ने कहा कि सावन केवल भक्ति का ही नहीं, बल्कि सृजन, स्नेह और सांस्कृतिक पहचान का भी महीना है। यह आयोजन भावनात्मक जुड़ाव का श्रेष्ठ उदाहरण है।
मौके पर पूर्णिमा सेठ, रीना कन्दवे, जयंती सेठ, नेहा भदानी,कल्याणी भदानी, सारिका कपसीमे, साधना भदानी, नेहा सरिता कपसीमे, रानी कुमारी, रश्मि एकघरा, अनुपमा ब्रह्मपुरिया, प्रीति बड़गवे, ललित भदानी, शालिनी तरवे, अनीता तरवे, सरोज पवनचौदह सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।