लुप्त होते पारंपरिक कारीगरों को बड़े बाजार तक ले जाने को लेकर प्रशासन गंभीर

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गुमला जिले में लुप्त होते पारंपरिक कारीगरों के विकास एवं उनके व्यापार को बड़े बाजार तक ले जाने को लेकर प्रशासन गंभीर है और इसी उद्देश्य से लघु कुटीर उद्योग विभाग द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने रायडीह के पारंपरिक मांदर कारीगरों से मुलाकात की और उनके पारंपरिक कार्यों,उनके वर्तमान आमदनी, कार्य शैली आदि से संबंधित जानकारी ली।

इस दौरान उपायुक्त ने लघु कुटीर उद्यमी समन्वयक सूरज कुमार को कारीगरों द्वारा निर्मित मांदर की मार्केटिंग, ब्रांडिंग सहित उनके उद्योग को बढ़ाने हेतु एक विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया।
उन्होंने कारीगरों द्वारा निर्मित मांदर के बाजार एवं डिमांड के संबंध में भी जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने सभी मांदर कारीगरों से बात की एवं उनकी भी बातों को सुना।
कारीगरों ने बताया कि ज्यादातर मांदर की बिक्री किसी मुख्य त्योहार के समय ही होती है एवं उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रत्येक परिवार प्रत्येक माह लगभग 2 से 3 ही मांदर बेच पाते हैं जिसे कारीगर स्वयं बाजार ले जाकर बेचते हैं।
उनके द्वारा मांदर, मृदंगा, नगाड़ा आदि बनाए जाते हैं। उपायुक्त ने कारीगरों को मार्केटिंग तकनीक से भी अवगत कराया एवं कहा कि सभी कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने एवं उनके उत्पाद से लेकर बिक्री तक की प्रक्रिया में जिला प्रशासन का पूरा सहयोग रहेगा।

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