विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक लोकतंत्र पर हमला

कल झारखंड विधानसभा में पास हुए नए विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के तहत अब विश्वविद्यालयों में छात्र संघ का चुनाव वोटिंग से नहीं होगा, बल्कि सरकार द्वारा नामित पदाधिकारी ही कुलपति और प्रो-वीसी के परामर्श से नियुक्त किए जाएंगे।
यह निर्णय पूर्णतः छात्र विरोधी है और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्र संघ ही छात्रों की आवाज़ होती है। वोटिंग से चुना गया छात्र संघ ही छात्रों की वास्तविक समस्याओं को उठाता है। लेकिन सरकार का यह कदम छात्रों की आवाज़ को दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने की दिशा में उठाया गया है।
छात्र संघ का चुनाव वोटिंग से न होने का मतलब है कि अब छात्र राजनीति पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में होगी। यह न केवल छात्रों की भागीदारी को कमजोर करेगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी छात्र हित की उपेक्षा होगी।
आजसू छात्र संघ स्पष्ट करना चाहता है कि यदि सरकार इस तुगलकी फ़रमान को वापस नहीं लेती है तो राज्य भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। छात्र संघ का चुनाव छात्रों के वोटिंग अधिकार से ही होना चाहिए।

अभिषेक राज
आजसू छात्र नेता

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