शहर में गुंडो के सहारे शासन करना चाहते लोग.. रघुवर दास

शहर में गुंडो के सहारे शासन करना चाहते लोग.. रघुवर दास

अरुणा शंकर द्वारा बनाया गया मरीन ड्राइव बना झारखंड का रोल मॉडल ।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सोमवार को चैनपुर बाजार में आयोजित विशाल जनसभा के जरिए हुंकार भरी कि मेदिनीनगर नगर निगम में किसी भी कीमत पर भय और आतंक का राज कायम नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने निगमवासियों से अपील की कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते हुए एकजुट होकर मतदान करें ताकि अपराधियों और रंगदारी मांगने वालों को करारा जवाब दिया जा सके.सभा में पूर्व सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए ‘रेट चार्ट’ तैयार है। उन्होंने कहा कि मेदिनीनगर की जनता अब विकास चाहती है, विनाश नहीं। अरुणा शंकर के पक्ष में जनसमर्थन मांगते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित उम्मीदवार की जीत ही शहर में सुरक्षा विकास और सुशासन की गारंटी देगी,क्योंकि विरोधी यहां भय के बल पर जनादेश प्राप्त करने की कोशिश कर रहे ,जनता भयमुक्त हो कर रहे इसके लिए उनके कार्यकाल में प्रयास किया गया ,अरूणा शंकृर ने मेयर के रूप में शांति के साथ विकास का वातावरण तैयार किया हैं ,उसमें एक कोयल रिवर फ्रंट पूरे राज्य का माडल हैं , मेदिनीनगर की जनता विकास और अमन पसंद हैं इसलिए अरूणा शंकर की जीत तय हैं .

पूर्व सीएम की एंट्री से पलटा समीकरण, अरुणा शंकर की राह की आसान
मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव का रण अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की चुनावी मैदान में सीधी एंट्री ने मुकाबले को पूरी तरह रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो रघुवर दास के आने से भाजपा समर्थित प्रत्याशी अरुणा शंकर के पक्ष में फिजा बदलने लगी है।
समर्थन का ‘मास्टरस्ट्रोक’
इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर दो कद्दावर उम्मीदवारों— मीना गुप्ता और जयश्री (ट्विंकल) गुप्ता का अरुणा शंकर को समर्थन देना है। इन दोनों प्रत्याशियों के अरुणा के साथ खड़े होने से न केवल भाजपा का वोट बैंक मजबूत हुआ है, बल्कि प्रतिद्वंद्वी खेमे में खलबली मच गई है। इस गोलबंदी ने अरुणा शंकर की जीत की राह को काफी हद तक आसान कर दिया है।
इस बार मेदिनीनगर का चुनाव केवल सड़क-नाली के मुद्दों तक सीमित नहीं है। चुनाव अब ‘भय और विरासत की चोट’ के एजेंडे पर केंद्रित हो गया है। क्षेत्र में जिस तरह से रंगदारी और असुरक्षा का मुद्दा गरमाया है, उससे आम जनता के बीच सुरक्षा और शांति के पक्ष में व्यापक गोलबंदी देखी जा रही है।एक तरफ विरासत की राजनीति है, तो दूसरी तरफ अरुणा शंकर के पिछले कार्यकाल के विकास का
रघुवर दास के सक्रिय प्रयास भाजपा के परंपरागत वोट बैंक को सक्रिय कर दिया है।
ट्विंकल और मीना गुप्ता के समर्थन ने इसे त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले से निकालकर सीधे तौर पर अरुणा शंकर के पक्ष में झुका दिया है।
मेदिनीनगर की जनता इस बार शांति और विकास के पक्ष में ‘वोट की चोट’ करने को तैयार दिख रही है। अब देखना यह है कि मतदान के दिन यह गोलबंदी कितनी मजबूती से दर्ज होती है।