सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का उत्सव है होली : डॉ टी पीयूष

सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का उत्सव है होली : डॉ टी पीयूष

होली के शुभ अवसर पर नवोदित रचनाकारों को समर्पित ‘काव्यानुरागी’ का भव्य आयोजन सम्पन्न।

होली के पावन एवं उल्लासमय अवसर पर नवोदित रचनाकारों को समर्पित ‘काव्यानुरागी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन उत्सव गार्डन, नवादा मोड़, गढ़वा में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच के तत्वावधान में किया गया, जिसमें क्षेत्र के युवा और प्रतिभाशाली रचनाकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं से वातावरण को काव्यमय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाज एवं रंगों की सांस्कृतिक छटा के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. टी. पीयूष ने होली की पवित्रता और मर्यादा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने आधुनिक समय में त्योहारों की बदलती परंपराओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें होली की सांस्कृतिक गरिमा और नैतिक मर्यादाओं को बनाए रखना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रमोद कुमार ने ‘काव्यानुरागी’ का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह मंच नवोदित रचनाकारों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का सशक्त अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और ऐसे आयोजन नवचेतना के संवाहक बनते हैं।

काव्य प्रस्तुति के क्रम में जयपूर्णा विश्वकर्मा ने “आई होली, आई होली
रंगों की सौगात ले आई…” की सुन्दर प्रस्तुति दी।

प्रमोद कुमार ने “आज अद्भुत धरा का श्रृंगार रसिया,
देखो, आया है होली का त्योहार रसिया…” की प्रस्तुति से सभी को झूमने को विवश कर दिया।

डॉक्टर टी पीयूष ने “जब चरण पड़े विद्यार्मियों के, धर्म होता उजाड़ उठा…” के माध्यम से सभी को अत्यंत प्रभावित किया।

राजीव रंजन तिवारी ने “प्रकृति की जय जयकार, परिवर्तन की जय जयकार,
किसानी की जय जयकार ,
जवानी की जय जयकार…” को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

परशुराम ने “बटहुआ होली में छुट्टी लेकर आईल बा, बहुत दिनों के बाद होली में धराईल बा…” की प्रस्तुति से सभी को खूब गुदगुदाया।

अन्य सभी ने भी अपनी-अपनी कविताओं की भावपूर्ण एवं प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की। उनकी रचनाओं में होली के रंग, सामाजिक संदेश और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का संचालन मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने प्रभावपूर्ण एवं सजीव शैली में किया, जिससे संपूर्ण आयोजन अनुशासित और आकर्षक बना रहा। उनके संयोजन ने कार्यक्रम को गरिमा और प्रवाह प्रदान किया।
समापन के अवसर पर सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया।
‘काव्यानुरागी’ का यह आयोजन होली के रंगों के साथ साहित्यिक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम बनकर उपस्थित जनसमूह के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।

आयोजन को सफल बनाने में गीतांश टीवी एण्ड फिल्म्स के निदेशक प्रदीप कुमार एवं उत्सव गार्डन के प्रोपराइटर अनिल सोनी सहित सरिता देवी और समीर कुमार की अहम भूमिका रही।