रेड़मा ठाकुरबाड़ी मंदिर में 19 मार्च से 59वां श्री रामचरितमानस यज्ञ प्रारंभ

भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में 59वां श्री रामचरितमानस यज्ञ 19 मार्च से
रेड़मा ठाकुरबाड़ी मंदिर के पावन प्रांगण में 59वां श्री रामचरितमानस यज्ञ 19 मार्च से श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच प्रारंभ होगा।यज्ञ का शुभारंभ 18 मार्च की संध्या बेला में विधिवत हनुमंत पूजन के साथ किया जाएगा।मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटा-घड़ियाल और भजन-कीर्तन से भक्तिमय वातावरण का सृजन होगा।
यज्ञ समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी (रिंकू)ने जानकारी देते हुए बताया कि यह यज्ञ क्षेत्र की आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन है।जो वर्षों से श्रद्धालुओं को धर्म,संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों से जोड़ता आ रहा है।
इस अवसर पर भारत की सुविख्यात मानस कोकिला देवी चंद्रकला अपनी मधुर वाणी में संगीतमय रामचरितमानस का पाठ एवं व्याख्यान प्रस्तुत करेंगी जिससे श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होंगे।साथ ही अन्य विद्वान मानस वक्ता भी अपने अमृतमय प्रवचनों से धर्मप्रेमियों का मार्गदर्शन करेंगे।
यज्ञ के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन हेतु समिति का गठन किया गया है।प्रवीण तिवारी (बंटू) को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि संतोष तिवारी (पिंकू) मंत्री होंगे।मनोज तिवारी (पिंटू),सत्य प्रकाश (मोनू)एवं पारस विश्वकर्मा उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।विनय प्रसाद संगठन मंत्री तथा पंकज सिंह सह संगठन मंत्री बनाए गए हैं।विकास तिवारी भंडारा एवं प्रसाद व्यवस्थापक,संदीप विश्वकर्मा पूजा पंडाल व्यवस्थापक,भानु पांडेय कार्यालय मंत्री के रूप में दायित्व निभाएंगे।मार्गदर्शक मंडल में कुणाल शांति प्रिय,बबलू तिवारी,गुड्डू तिवारी,धनंजय तिवारी,सुशील तिवारी एवं अखिलेश तिवारी को शामिल किया गया है।वहीं कार्यकारिणी सदस्य के रूप में छोटू पाठक,श्याम देव तिवारी, आर्यन तिवारी,पिंटू,संजय राम, लल्लू राम,कालु,गौतम,बलवंत एवं बबलू विश्वकर्मा को दायित्व दिया गया है।
यज्ञ के सफल संचालन और समन्वय स्थापित करने के लिए नवीन तिवारी को समन्वय समिति का सदस्य एवं मीडिया प्रभारी बनाया गया है।
समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर प्रभु श्रीराम की कथा,भजन-कीर्तन और यज्ञ में सहभागिता कर अपने जीवन को धर्ममय एवं पुण्यमय बनाएं।यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है बल्कि समाज में सद्भाव,संस्कार और एकता का संदेश भी देता है