प्रकृति का महापर्व सरहुल: सतबरवा में सखुआ की पूजा के साथ गूंजा मांदर, विधायक समेत हजारों ने झूमकर मनाया उत्सव

प्रकृति का महापर्व सरहुल: सतबरवा में सखुआ की पूजा के साथ गूंजा मांदर, विधायक समेत हजारों ने झूमकर मनाया उत्सव

सतबरवा (पलामू, झारखंड): आदिवासी संस्कृति की जीवंत धरोहर और प्रकृति पूजा का सबसे बड़ा प्रतीक सरहुल पर्व सतबरवा प्रखंड मुख्यालय में धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। अद्दि कुड़ुख सरना समाज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में जल-जंगल-जमीन के संरक्षण का गहरा संदेश गूंजा, जबकि परंपरा और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिला।

सरना स्थल पर पाहन (पुजारी) ने सखुआ (साल) वृक्ष के नीचे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सरई फूलों की अर्पणा के साथ नई फसल, सुख-समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की कामना की गई। सरहुल, जिसका अर्थ ‘साल वृक्ष की पूजा’ है, आदिवासी समुदायों (खासकर उरांव, मुंडा आदि) के लिए नए साल की शुरुआत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। यह पर्व सूर्य और धरती के मिलन को दर्शाता है, जहां प्रकृति को मां के रूप में पूजा जाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष विष्णुदेव उरांव ने की। मुख्य अतिथि पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने दीप प्रज्वलित कर शुभकामनाएं दीं और कहा, “सरहुल सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी अटूट आस्था और पर्यावरण संरक्षण की जीती-जागती मिसाल है। सखुआ की पूजा हमें सिखाती है कि जंगल हमारा जीवन है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है।”

मांदर, ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु झूम उठे। विधायक के साथ जनता भी नाच-गाकर उत्सव में शामिल हुई, जिसने पूरा माहौल रंगीन और उत्सवमय बना दिया। अतिथियों का अंग वस्त्र भेंट कर स्वागत किया गया।

विधायक प्रतिनिधि अजय उरांव और समाजसेवी आशीष कुमार सिन्हा ने सरहुल को आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का मजबूत माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल आस्था का है, बल्कि सामुदायिक एकता और प्रकृति से जुड़ाव का भी।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सतबरवा थाना की पुलिस टीम ने जुलूस, पूजा और भीड़ नियंत्रण में उत्कृष्ट भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम पूरी शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर प्रखंड सचिव *प्रवेश उरांव, उपाध्यक्ष **विनय उरांव, मुखिया **रिंकी यादव, जिप सदस्य **सुधा कुमारी, मुखिया **निरुतमा कुमारी, **राणा प्रताप कुशवाहा, सांसद प्रतिनिधि **मनीष कुमार, **संदीप कुमार, **सोनू सिकंदर, विधायक प्रतिनिधि **संजय उरांव, मुखिया **गिरवर राम, पूर्व उप मुखिया **कौशल प्रसाद, **दीपक चंद्रवंशी, **लाल बिहारी साहू, कोषाध्यक्ष **इंद्रदेव उरांव, पूर्व मुखिया **केवल उरांव, *संदीप उरांव सहित जनप्रतिनिधि, समाज के गणमान्य व्यक्ति, महिलाएं, पुरुष, बच्चे-बच्चियां बड़ी संख्या में शामिल हुए।

सरहुल ने एक बार फिर साबित किया कि आदिवासी समाज प्रकृति से कितना गहराई से जुड़ा है—यह उत्सव सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति सम्मान का जीवंत प्रमाण है।