पेसा नियमावली पर उबाल: आदिवासी परंपरा के अनुरूप संशोधन नहीं हुआ तो होगा जोरदार आंदोलन
पेसा नियमावली पर उबाल: आदिवासी परंपरा के अनुरूप संशोधन नहीं हुआ तो होगा जोरदार आंदोलन
गुमला। जशपुर रोड स्थित पर्यटक भवन में पेसा अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बेल पड़ा पड़ा झारखंड के नेतृत्व में हुई, जिसमें 2 जनवरी को झारखंड सरकार द्वारा पारित पेसा नियमावली के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2022 में बनाई गई नियमावली में किए गए कई बदलाव आदिवासी परंपराओं, रीति-रिवाजों और ग्राम सभा की पारंपरिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। सदस्यों ने स्पष्ट रूप से सरकार से मांग की कि उक्त नियमावली में अविलंब संशोधन किया जाए, अन्यथा व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसे रोक पाना संभव नहीं होगा।
बैठक में यह भी मांग उठाई गई कि जिला उपायुक्त को कमेटी गठन का जो अधिकार दिया गया है, उसे वापस लिया जाए। यह अधिकार आदिवासी परंपरा के अनुसार ग्राम सभा को ही मिलना चाहिए। साथ ही संस्था एवं ट्रस्ट को प्रशिक्षण और कमेटी गठन से संबंधित दिए गए सरकारी आदेश का भी कड़ा विरोध जताया गया।
उपस्थित सदस्यों ने कहा कि पेसा अधिनियम का मूल उद्देश्य आदिवासी स्वशासन और ग्राम सभा को सशक्त बनाना है, लेकिन वर्तमान नियमावली उस भावना के विपरीत प्रतीत होती है।
बैठक में दीवान मूलचंद, राजूराम, विनोद, परमल, महेंद्र उरांव, राजवीर राव, लाला उरांव, विनोद उरांव, विमला देवी, बसंत राम, तपेश्वर राव, अर्जुन उरांव सहित कई लोग मौजूद थे। अंत में महेंद्र उरांव द्वारा संयुक्त बयान जारी कर सरकार से मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की गई।



