पांकी में निजी विद्यालय के हॉस्टल में पढ़ रही 6 वर्षीय आदिवासी बच्ची की हुई मौत, गांव में पसरा मातम

पांकी में निजी विद्यालय के हॉस्टल में पढ़ रही 6 वर्षीय आदिवासी बच्ची की हुई मौत, गांव में पसरा मातम

पांकी के बसडीहा स्थित चंदो देवी आवासीय विद्यालय में पढ़ रही थी बच्ची, मुंह से निकल रहा था झाग

पांकी प्रखंड के बसडीहा स्थित चांदो देवी आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही 6 वर्षीय आदिवासी बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी के अनुसार रतनपुर पंचायत के तेतरखाड़ गांव निवासी जियालाल उरांव की 6 वर्षीय बच्ची असरंती कुमारी बीते 6 महीने से चंदो देवी आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। घटना से तीन-चार दिन पहले ही वह अपने घर से हॉस्टल आई थी, 26 मार्च की दोपहर विद्यालय में ही उसका अचानक तबीयत खराब हुआ इसके बाद विद्यालय के डायरेक्टर श्याम कुमार के द्वारा इलाज हेतु उसे पांकी स्थित डॉ वीरेंद्र कुमार के निजी क्लीनिक में ले जाकर भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। घटना के बाद बच्ची के परिजन रोते बिलखते क्लिनिक पहुंचे एवं कुछ देर बाद वे बच्ची के शव को घर ले गए, घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है एवं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। शनीवार को बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इधर घटना के बाद विद्यालय के डायरेक्टर श्याम कुमार एवं क्लीनिक संचालक डॉक्टर बिरेंद्र कुमार के द्वारा आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
आवासीय विद्यालय के डायरेक्टर श्याम कुमार की मानें तो बच्ची की तबीयत खराब होने पर वे तत्काल इलाज हेतु डॉक्टर अबरार के क्लीनिक में ले गए जहां डॉ अबरार के द्वारा बच्ची की स्थिति ज्यादा नाजुक बताते हुए उसे इलाज हेतु डॉक्टर वीरेंद्र के पास ले जाने की सलाह दी गई, जिसके बाद वे डॉ वीरेंद्र के क्लीनिक में बच्ची को लेकर पहुंचे इस दौरान क्लीनिक में डॉक्टर वीरेंद्र उपस्थित नहीं थे लेकिन उनकी अनुपस्थिति में क्लीनिक के कर्मियों के द्वारा बच्ची का इलाज शुरू किया गया इस दौरान बच्ची को तीन इंजेक्शन भी लगाए गए व डॉ वीरेंद्र के सहयोगियों ने बच्ची के कुछ घंटे में ठीक हो जाने का भरोसा भी दिलाया, लेकिन इलाज के दौरान बच्ची की अचानक मौत हो गई। बच्ची के मौत होने के पूर्व डायरेक्टर श्याम कुमार पानी पीने क्लीनिक बाहर गए थे जब उन्होंने वापस आया तो देखा की बच्ची की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि क्लीनिक के कर्मचारी के आश्वासन पर उन्होंने बच्ची को वहां भर्ती कराया था, बच्ची की स्थिति ज्यादा खराब थी तो उन्हें क्लीनिक के कर्मचारियों ने सूचित क्यों नहीं किया, यदि उन्हें पूर्व में सूचना दी जाती तो वे बच्ची को इलाज हेतु बाहर ले जाते।
इधर घटना के बाद मौके पर पहुंचे डॉक्टर वीरेंद्र ने घटना का जिम्मेवार डायरेक्टर श्याम कुमार को ठाहराते हुए कहा कि बच्ची की स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी उसके मुंह से झाग निकल रहा था, बावजूद उसे सरकारी अस्पताल ले जाने की बजाय उनके क्लीनिक में लाया गया, बच्ची को कंपाउंडर के भरोसे छोड़कर श्याम कुमार कहीं बाहर चले गए ,उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के अनुसार बच्ची की तबीयत कई दिनों से खराब रही होगी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया, ब्लड में बहुत ज्यादा इंफेक्शन था एवं मुंह से झाग आ रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक इस स्थिति में बच्ची का झाड़ फूंक भी करवा रहे थे और कई क्लीनिक का चक्कर लगा रहे थे ,जबकि उन्हें इलाज हेतु बाहर ले जाना चाहिए था।
इधर घटना के बाद मृत बच्ची की मां की आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे, रह रह कर अपनी बच्ची को याद कर वे बेसुध हो जा रही हैं,
बच्ची के परिजनों के द्वारा इस घटना पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया जा रहा है।

घटना के संबंध में पांकी थाना प्रभारी राजेश रंजन ने बताया कि बच्ची के मौत होने की खबर प्राप्त हुई है लेकिन पीड़ित परिवार के द्वारा घटना के संबंध में किसी तरह का कोई आवेदन शिकायत उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है, पंचायत प्रतिनिधियों एवं परिजनों के द्वारा इस संबंध में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई गई है।

इस संबंध में चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर महेंद्र प्रसाद ने बताया कि मामले की जांच की गई जहां पता चला कि विद्यालय के शिक्षक के द्वारा गंभीर अवस्था में बच्ची को इलाज हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ना ले जाकर डॉ वीरेंद्र के क्लीनिक में भर्ती कराया गया था इस दौरान शिक्षक वहां बच्ची को छोड़कर कहीं चले गए थे।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एमबीबीएस डॉक्टर 24 घंटे मरीजों की सेवा के लिए तत्पर है, यदि समय रहते बच्ची का समुचित इलाज होता तो उसकी जान बच सकती थी।

घटना को लेकर प्रखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है व इस घटना को लेकर तरह-तरह के कयास भी लगाया जा रहे हैं भाजपा नेत्री मंजूलता जिला परिषद सदस्य खुशबू कुमारी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर घटना पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें मदद का भरोसा दिलाया है, वहीं कई लोगों ने आवासीय विद्यालय के कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं, विद्यालय के डायरेक्टर के अनुसार विद्यालय का यू डाइस कोड नहीं है व यह आवासीय विद्यालय ट्रस्ट द्वारा संचालित है।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि प्रखंड क्षेत्र में इन दोनों दर्जनों आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है जिसका कोई भी डाटा शिक्षा विभाग के पास नहीं है।