पांकी के केलहवा में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार चरम पर, पहले आहार में बना डोभा, फिर डोभा में डोभा
पांकी के केलहवा में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार चरम पर, पहले आहार में बना डोभा, फिर डोभा में डोभा
पंचायत कर्मियों एवं मुखिया की मिली भगत से हो रहा खेल, बगैर कार्य किए की गई लाखों की निकासी
पांकी प्रखंड के केलहवा पंचायत में मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है, पंचायत के केलहवा गांव से सटे तेलडीहा आहार का स्वरूप बदलकर एक ही स्थान पर लगभग आधा दर्जन डोभा का निर्माण कार्य किया गया है, इतना ही नहीं वर्तमान समय में पुराने डोभा के मेढ़ को थोड़ा मरम्मत कर उसे नया डोभा बतलाकर 359874 रुपए की मजदूरी राशि की निकासी की जा चुकी है। पुराने डोभा में मरम्मत का कार्य देखकर ग्रामीणों ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पूर्व में जावेद अंसारी के डोभा के स्थान पर फर्जी तरीके से मानो बीबी के डोभा का कार्य बतलाकर 359874 की राशि निकासी की जा चुकी है। जबकि स्थल पर मात्र दो मजदूरों से सिर्फ एक दिन मेढ़ की मरम्मती की गई है जबकि पिछले दो हफ्तों की बात करें तो 63000 मजदूरी भुगतान लिया जा चुका है।
डोभा में पड़ी दरारें लंबे समय से कार्य नहीं होने की दे रही गवाही- पुराना डोभा होने के करण डोभा में पानी जमा रहता था लेकिन बरसात के बाद पानी सूख गया जिससे डोभा की तल में दरारें पड़ गई जिसे यह साफ प्रदर्शित होता है कि स्थल पर मिट्टी कटाव को लेकर कोई कार्य नहीं हुआ है सिर्फ मेढ़ की आंशिक मरम्मती की गई है जिसे स्पष्ट रूप से स्थल पर देखा जा सकता है।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में यहां तेलडीहा आहार था जो अब नक्शे से गायब हो चुका है, आहार में लगातार पांच डोभा का निर्माण कार्य पूर्व मुखिया के कार्यकाल में किया गया है एवं वर्तमान मुखिया के कार्यकाल में पुराने डोभा को ही नया बतलाकर लाखों की निकासी की जा रही है, ग्रामीणों ने अधिकारियों से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि एक ही स्थान पर एक साथ 5 से 6 डोभा का निर्माण कार्य किया जाना आश्चर्य की बात है, कार्यस्थल पर किसी तरह का कोई बोर्ड भी नहीं लगाया जाता है ताकि योजना संबंधित कोई जानकारी सार्वजनिक ना हो, ग्रामीणों ने पंचायत कर्मियों एवं मुखिया पर सिर्फ पैसे कमाने के उद्देश्य से भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में मनरेगा योजनाओं की गहनता से जांच की जाए तो कई योजनाएं धरातल से गायब भी मिलेंगे।
आपको बता दें कि मनरेगा योजना में कार्य करने के बाद ही लाभुक के खाते में भुगतान किया जाता है कार्य करने के दौरान मजदूरों का जीपीएस फोटो रोजगार सेवक के द्वारा स्थल पर जाकर अपलोड किया जाता है साथ ही इस दौरान मनरेगा कर्मियों के द्वारा स्थल का भी भौतिक सत्यापन किया जाता है इस कार्य में मनरेगा रोजगार सेवक के अलावे जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर मुखिया पंचायत सचिव एवं मेठ की भूमिका होती है, साथ ही योजनाओं का चयन भौतिक सत्यापन के बाद ही किया जाता है एवं कार्य पर लगातार मनरेगा कर्मियों के द्वारा रिपोर्टिंग की जाती है बावजूद एक स्थल पर सीरीज की तरह डोभे का निर्माण एवं डोभे में डोभे का निर्माण पूरे भ्रष्ट तंत्र की पोल खोल रहा है।
इस संबंध में मनरेगा बीपीओ विष्णु मिश्रा से पूछे जाने पर उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया

