नशा एक गंभीर शारीरिक सह समाजिक बुराई है —- अभिषेक तिवारी

नशा एक गंभीर शारीरिक सह समाजिक बुराई है —- अभिषेक तिवारी
पलामू में मादक पदार्थों के विरुद्ध जिला प्रशासन ने तैयार की अभेद्य रणनीति: प्रखंड स्तर पर एक महिला शिक्षिका तथा एक पुरुष शिक्षक नोडल पदाधिकारियों की होगी नियुक्ति, ग्रामीण युवाओं , विद्यार्थियों और महिलाओं को नशामुक्ति के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर*

मेदिनीनगर (पलामू): पलामू जिले को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने और मादक पदार्थों के बढ़ते प्रभाव को जड़ से समाप्त करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। इसी कड़ी में मादक पदार्थों के सहायक जिला पदाधिकारी अभिषेक कुमार तिवारी ने उप विकास आयुक्त जावेद हुसैन से उनके कार्यालय में मुलाकात की। डीडीसी ने विज्ञान शिक्षक अभिषेक तिवारी को ऊर्जावान और अनेकों युवाओं का प्रेरणाश्रोत बताया है इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जिले में व्याप्त नशाखोरी की समस्या, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में इसके बढ़ते प्रसार पर गहन चिंता व्यक्त की गई और इसे नियंत्रित करने के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई। सहायक जिला पदाधिकारी ने उप विकास आयुक्त से मार्गदर्शन प्राप्त करते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किस प्रकार शासन की नीतियों को धरातल पर उतारकर समाज के अंतिम व्यक्ति को नशे की भयावहता से बचाया जा सके।
बैठक के मुख्य केंद्र बिंदु में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के युवा और महिलाएं रहीं। प्रशासन का मानना है कि नशे का कारोबार सबसे अधिक युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है बल्कि सामाजिक ताना-बाना भी छिन्न-भिन्न हो रहा है। इसके साथ ही, महिलाओं को इस अभियान से जोड़कर उन्हें जागरूक करने पर सहमति बनी ताकि वे अपने परिवार और आसपास के परिवेश को इस बुराई से सुरक्षित रख सकें। अभिषेक कुमार तिवारी ने जानकारी दी कि ग्रामीणों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे प्रलोभन और अज्ञानता के जाल से बाहर निकल सकें।
इस अभियान को प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत अब पलामू जिले के सभी प्रखंडों में मादक पदार्थ नोडल पदाधिकारियों का मनोनयन किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नशामुक्त अभियान केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहकर सुदूरवर्ती गांवों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। इन नोडल पदाधिकारियों की देखरेख में प्रत्येक प्रखंड में निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा और मादक पदार्थों की बिक्री व सेवन से जुड़ी सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

उप विकास आयुक्त के साथ विचार-विमर्श के उपरांत कार्य को समेकित ढंग से करने का एक विस्तृत प्रारूप तैयार किया गया है। इस प्रारूप का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है ताकि मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में निरंतरता बनी रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि एक ऐसी कार्यप्रणाली विकसित की जाए जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस प्रशासन मिलकर एक साझा मंच पर कार्य करें। इस संगठित प्रयास से न केवल नशे की मांग में कमी आएगी, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधित किया जा सकेगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में नशामुक्ति को एक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी अनिवार्य होगी।